पानी का हिसाब नहीं : फिर भी धड़ल्ले से धुल रहे थे वाहन
Sun, Sep 6, 2026
डीएम के निर्देश पर एसडीएम-ईओ के साथ प्रदूषण नियंत्रण और भूगर्भ विभाग की टीम ने खंगाले वाहन धुलाई सेंटर
उन्नाव। शहर के लोकनगर में वाहनों की धुलाई के नाम पर भूगर्भ जल के इस्तेमाल को लेकर प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। जिलाधिकारी के निर्देश पर रविवार को अलग-अलग विभागों की संयुक्त टीम ने लोकनगर पहुंचकर वाहन धुलाई सेंटरों की पड़ताल की। टीम को कई सेंटर ऐसे मिले, जहां संचालन के लिए जरूरी लाइसेंस नहीं लिया गया था। अधिकारियों ने मौके पर संचालकों को नियमों का पालन करने और लाइसेंस प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए। सदर एसडीएम राजेश कुमार विश्वकर्मा की मौजूदगी में चले अभियान में नगर पालिका के ईओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और भूगर्भ विभाग के अधिकारी शामिल रहे। टीम ने सेंटरों पर पहुंचकर यह देखा कि वाहन धुलाई के लिए पानी की व्यवस्था कहां से की जा रही है और सेंटर संचालन के लिए आवश्यक अनुमति ली गई है या नहीं। जांच में बिना लाइसेंस सेंटर चलते मिलने पर जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद की ओर से संबंधित संचालकों को नोटिस दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि वाहन धुलाई के लिए भूगर्भ जल का इस्तेमाल नियमों के तहत ही किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी अनुमति और लाइसेंस लेना अनिवार्य है। बिना प्रक्रिया पूरी किए सेंटर चलाने पर आगे कार्रवाई की जा सकती है।
पानी की बर्बादी पर भी नजर
वाहन धुलाई सेंटरों में बड़ी मात्रा में पानी खर्च होता है। ऐसे में प्रशासन की नजर केवल लाइसेंस तक सीमित नहीं है, बल्कि पानी के इस्तेमाल और भूगर्भ जल संरक्षण से जुड़े नियमों के पालन पर भी है। अधिकारियों ने संचालकों को निर्देश दिए कि वे निर्धारित मानकों के अनुसार ही सेंटर संचालित करें।
विभागों के साथ मिलकर होगी निगरानी
डीएम के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान में कई विभागों की मौजूदगी से साफ है कि प्रशासन अब ऐसे सेंटरों की गतिविधियों को लेकर गंभीर है। अधिकारियों ने संचालकों को लाइसेंस बनवाकर ही सेंटर चलाने की हिदायत दी है। कार्रवाई के बाद लोकनगर में बिना अनुमति वाहन धुलाई सेंटर संचालित करने वालों में हलचल रही। एसडीएम राजेश कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि जल संरक्षण को लेकर प्रशासन गंभीर है। भूगर्भ जल के अवैध इस्तेमाल पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सेंटर संचालकों को चेताया कि बिना अनुमति दोबारा संचालन मिला तो कार्रवाई तय है।
राहत : अब आसान होगा कस्टोलवा का रास्ता
Sun, Sep 6, 2026
पचकरा पुल के लिए 1.77 करोड़ मंजूर, नगर पंचायत के व्यस्त मार्ग को मिलेगी नई रफ्तार
उन्नाव। नगर पंचायत पुरवा के कस्टोलवा मोहल्ले से होकर गुजरने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। यहां सबसे व्यस्त मार्ग पर स्थित पचकरा पुल के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। पुल के निर्माण के लिए 1 करोड़ 77 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इससे लंबे समय से पुल की जरूरत महसूस कर रहे स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।कस्टोलवा मोहल्ले का यह मार्ग नगर पंचायत के प्रमुख रास्तों में शामिल है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। पुल के निर्माण से न केवल मोहल्ले के लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि आसपास के इलाकों से आने-जाने वालों के लिए भी रास्ता सुगम होने की उम्मीद है।
आवागमन में आएगी आसानी
पचकरा पुल क्षेत्र के लिए महज एक पुल नहीं, बल्कि रोजमर्रा के आवागमन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मार्ग पर लोगों की आवाजाही के साथ ही स्थानीय जरूरतों से जुड़े वाहनों का भी आवागमन रहता है। पुल बनने के बाद इस मार्ग की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
विधायक के प्रयास से मिली मंजूरी
पुरवा विधायक अनिल सिंह के प्रयासों के बाद पुल निर्माण के लिए 1.77 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई है। धनराशि स्वीकृत होने के बाद अब निर्माण कार्य शुरू होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। स्थानीय लोगों ने इसे नगर पंचायत क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण विकास कार्य बताया है।
लंबे समय से थी जरूरत
स्थानीय लोगों के मुताबिक कस्टोलवा का यह मार्ग काफी व्यस्त रहता है। ऐसे में यहां बेहतर पुल की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। निर्माण पूरा होने के बाद लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने के साथ क्षेत्र के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।
20 साल से भगवंतनगर में सेवा का सफर : अब बच्चों के सपनों का सहारा
Sun, Sep 6, 2026
फीस के लिए नहीं रुके कदम, सात होनहार बच्चों की पढ़ाई में 5.27 लाख रुपये की मदद
अंकित परिहार बोले, किसी बच्चे का सपना पैसे की कमी से नहीं टूटना चाहिए
उन्नाव। किसी बच्चे की आंखों में डॉक्टर, इंजीनियर या अधिकारी बनने का सपना हो और उसके माता-पिता फीस की चिंता में परेशान हों, तो उस चिंता को अपना समझकर मदद के लिए आगे आना आसान नहीं होता। लेकिन भगवंतनगर में पिछले करीब 20 वर्षों से लोगों के बीच रहकर सेवा कार्यों से जुड़े अंकित सिंह परिहार के लिए यह केवल मदद नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का हिस्सा है। उनका मानना है कि समाज में बदलाव की शुरुआत तभी होगी, जब बच्चों को पढ़ने और आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। इसी सोच के साथ उन्होंने परिवार क्षेत्र के सात प्रतिभाशाली बच्चों की उच्च शिक्षा में आर्थिक सहयोग किया है। गरिमा निषाद, अनेन्द्र सिंह चौहान, आस्था रावत, अनुजा पटेल, अखिल अवस्थी, सुनिधि गौतम और अंशिका यादव की मेडिकल, इंजीनियरिंग, एमबीए समेत अन्य उच्च शिक्षा की फीस में उन्होंने कुल 5 लाख 27 हजार रुपये का सहयोग किया।
20 साल में बदली मदद की तस्वीर
भगवंतनगर में लंबे समय से सक्रिय अंकित परिहार का कहना है कि सेवा का मतलब केवल किसी जरूरतमंद को तत्काल मदद पहुंचाना नहीं है। असली बदलाव तब होगा, जब किसी बच्चे को इस तरह सक्षम बनाया जाए कि वह भविष्य में खुद अपने पैरों पर खड़ा हो सके। इसी सोच ने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए प्रेरित किया। करीब दो दशक के इस सफर में उन्होंने कई बच्चों की पढ़ाई में अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग किया। समय के साथ उन बच्चों में से कई ने अपनी पढ़ाई पूरी कर अलग-अलग क्षेत्रों में पहचान बनाई। कोई डॉक्टर बना तो किसी ने इंजीनियरिंग और प्रबंधन के क्षेत्र में कदम रखा। बच्चों की ऐसी सफलता को वह अपने लिए किसी सम्मान से कम नहीं मानते।
एक फीस, पूरे परिवार की चिंता कम
अंकित परिहार कहते हैं कि जब किसी परिवार का बच्चा उच्च शिक्षा में पहुंचता है तो उसके साथ माता-पिता की उम्मीदें भी जुड़ी होती हैं। लेकिन पढ़ाई का खर्च कई बार उन उम्मीदों पर भारी पड़ने लगता है। ऐसे समय में यदि किसी बच्चे की फीस की चिंता कम हो जाए तो परिवार को सिर्फ आर्थिक राहत नहीं मिलती, बल्कि बच्चे को भी आगे बढ़ने का भरोसा मिलता है।उनके मुताबिक, मदद की असली खुशी उस दिन मिलती है जब वही बच्चा मेहनत करके अपनी मंजिल हासिल करता है। उनके लिए रुपये की राशि से ज्यादा महत्वपूर्ण वह भविष्य है, जो किसी बच्चे की पढ़ाई पूरी होने के बाद बदल सकता है।
राजनीति से आगे सेवा की सोच
अंकित सिंह परिहार का कहना है कि युवाओं को सिर्फ राजनीति या सामाजिक गतिविधियों से जोड़ना पर्याप्त नहीं है। उन्हें शिक्षा, हुनर और रोजगार के रास्ते पर आगे बढ़ाना भी जरूरी है। उनकी कोशिश है कि क्षेत्र के युवा अपनी प्रतिभा के दम पर आगे आएं और किसी के सहारे के बजाय अपने पैरों पर खड़े हों।उन्होंने कहा कि मेरी राजनीति का उद्देश्य भी यही है कि हमारे युवाओं की ऊर्जा शिक्षा, हुनर और स्वावलंबन की दिशा में लगे। उनका मानना है कि पढ़ा-लिखा और आत्मनिर्भर युवा न केवल अपने परिवार को मजबूत करता है, बल्कि पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है।
बच्चों की कामयाबी को मानते हैं अपनी खुशी
अंकित परिहार कहते हैं कि उन्हें सबसे ज्यादा संतोष तब मिलता है, जब किसी ऐसे बच्चे को सफलता मिलती है जिसकी पढ़ाई में कभी उन्होंने सहयोग किया था। बच्चे की सफलता के पीछे उसकी मेहनत और परिवार का संघर्ष सबसे बड़ा कारण है, लेकिन अगर रास्ते में छोटी सी मदद भी काम आ जाए तो वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं। उनका कहना है कि भगवंतनगर में सेवा का यह सफर 20 साल पहले शुरू हुआ था और आगे भी जारी रहेगा। लक्ष्य यही है कि क्षेत्र का कोई प्रतिभाशाली बच्चा केवल आर्थिक परेशानी के कारण पढ़ाई से दूर न हो। बच्चे पढ़ें, अपने सपने पूरे करें और अपने परिवार के साथ भगवंतनगर का नाम भी रोशन करें, यही उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।