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: बांगरमऊ में कोडीनयुक्त सिरप कांड: 12 हजार बोतलें दस माह में बेंची, मेडिकल फर्म पर मुकदमा

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Sat, Nov 1, 2025
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कोडीनयुक्त सिरप की बिक्री पर पहले से है प्रदेशभर में रोक, फिर भी चल रहा खेल

 

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

उन्नाव। बांगरमऊ में चल रही एक मेडिकल फर्म पर कोडीन युक्त खांसी की दवा के अवैध कारोबार का खुलासा हुआ है। औषधि विभाग की जांच में फर्जी खरीद-बिक्री का मामला सामने आने के बाद फर्म के मालिक के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जानकारी के मुताबिक, मेसर्स अंबिका हेल्थ केयर नाम की फर्म के प्रोपराइटर अजय कुमार, निवासी परशुरामपुर, फतेहपुर चौरासी पर आरोप है कि उन्होंने रायबरेली की एक दवा कंपनी से फेन्सीपिक-टी और फेन्सीपिक-टीपी नाम की कोडीनयुक्त खांसी की दवाओं की 12 हजार बोतलें खरीदी थीं। ये वही दवाएं हैं जिनका गलत इस्तेमाल अक्सर नशे के लिए किया जाता है। औषधि निरीक्षक अशोक कुमार ने गुरुवार को बांगरमऊ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। हैरानी की बात है कि जांच के दौरान जब टीम ने फर्म परिसर की तलाशी ली तो वहां एक भी खांसी का सिरप नहीं मिला। अजय कुमार न तो बिक्री का कोई रजिस्टर दिखा सके, न बिल, न रसीद। तीन दिन का समय दिए जाने के बाद भी उन्होंने कोई दस्तावेज जमा नहीं किया। प्रशासन को शक है कि थोक लाइसेंस की आड़ में नशे की दवा की अवैध बिक्री की जा रही थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए औषधि विभाग ने सहायक आयुक्त (औषधि) के निर्देश पर एफआईआर दर्ज कराई है। रिपोर्ट में धोखाधड़ी, जनस्वास्थ्य को खतरे में डालने और आपराधिक साजिश जैसी धाराएं जोड़ी गई हैं। जिले में कोडीन युक्त खांसी की दवाओं का अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है। नशेबाज अब इलाज नहीं, बल्कि नशे के लिए सिरप का सहारा ले रहे हैं। खांसी सिरप जैसी दवाओं की मांग धड़ल्ले से बढ़ी है। मेडिकल स्टोरों से बिना बिल के इनका सौदा किया जा रहा है। औषधि विभाग की सख्ती के बावजूद यह कारोबार थम नहीं रहा। प्रशासन अब पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटा है। इधर, कोतवाल चंद्रकांत सिंह ने बताया कि केस की जांच दरोगा वीरेंद्र विक्रम सिंह को सौंपी गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी मात्रा में सिरप कहां-कहां सप्लाई की गई और इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है। प्रदेश स्तर पर खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. रोशन जैकब पहले ही कोडीन युक्त दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगा चुकी हैं। अब इस कार्रवाई ने औषधि विभाग और पुलिस दोनों की निगरानी और सख्त कर दी है।

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