: परियोजनाएं अधूरी, वादे पूरे नहीं — गंगा अब भी दूषित
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Mon, Oct 13, 2025
मार्च तक काम पूरा कराने का दावा, लेकिन जमीन पर धीमी रफ्तार
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
उन्नाव। शहर और शुक्लागंज में सीवरेज और जल निकासी की व्यवस्था सुधारने के लिए शुरू की गई परियोजनाएं अब तक अधूरी हैं। सरकार ने इन पर करीब 7.13 अरब रुपये खर्च किए, लेकिन छह साल बाद भी नतीजा नहीं निकला। हर दिन करीब 15 लाख लीटर गंदा पानी नालों से होकर सीधे गंगा में जा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर 2019 में शुरू हुई योजना का मकसद था कि शहर और औद्योगिक क्षेत्र के दूषित पानी को गंगा में जाने से रोकना। पर हालात अब भी वही हैं। गंगाघाट नगर पालिका क्षेत्र के पांच नाले सीधे गंगा में गिर रहे हैं।
अधूरी पड़ी सीवरेज परियोजना
2019 में केंद्र सरकार ने 3.80 करोड़ रुपये की योजना मंजूर की थी। इसे मार्च 2025 तक पूरा करना था। अब तक उन्नाव शहर के कुछ हिस्सों में सीवर लाइन और एक एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बन पाया है, पर उसे पूरी तरह चालू नहीं किया जा सका है। शुक्लागंज में तीन में से सिर्फ एक एसटीपी का लगभग 80 फीसदी काम पूरा हुआ है। दो अन्य एसटीपी अब भी शुरुआती चरण में हैं। वहीं जल निगम एक्सईएन अजीत कुमार ने बताया कि शुक्लागंज के अहमद नगर में पांच एमएलडी क्षमता वाला एसटीपी लगभग तैयार है। बाकी दो प्लांटों का काम जारी है। उन्होंने बताया कि बारिश और बाढ़ के कारण काम में देरी हुई, अब मार्च तक पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
दो महीने में ठप हुआ डकारी एसटीपी
122 करोड़ रुपये की लागत से बना डकारी एसटीपी जनवरी 2024 में चालू हुआ था। लेकिन महज दो महीने बाद ही यह बंद पड़ गया। 3.2 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन सिल्ट से भर जाने के कारण सीवरेज का प्रवाह रुक गया। यह परियोजना अक्टूबर 2019 में शुरू हुई थी और नवंबर 2022 तक पूरी होनी थी। इस प्लांट की क्षमता रोजाना 15 लाख लीटर गंदा पानी साफ करने की है। इधर, एक्सईएन अजीत कुमार का कहना है कि बाढ़ का पानी उतर रहा है, जल्द ही प्लांट दोबारा चालू किया जाएगा।
औद्योगिक क्षेत्र का प्लांट भी अधूरा
बंथर औद्योगिक क्षेत्र का कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) भी समय पर पूरा नहीं हो पाया है। इसे एनएमसीजी (नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा) के तहत 111 करोड़ रुपये से अपग्रेड किया जा रहा है। योजना सितंबर 2022 में शुरू हुई थी और मार्च 2025 तक तैयार होनी थी। सीईटीपी के जीएम ऋतुराज कुमार ने बताया कि अब इसकी समय सीमा एक साल बढ़ाकर मार्च 2026 कर दी गई है। उनका कहना है कि तय समय में काम पूरा कर लिया जाएगा।
छह साल बाद भी तस्वीर नहीं बदली
गंगा को साफ रखने का सपना अब भी अधूरा है। परियोजनाएं कागजों पर बढ़ रही हैं, पर काम की रफ्तार धीमी है। उन्नाव और शुक्लागंज से होकर हर दिन लाखों लीटर गंदा पानी गंगा में जा रहा है और जिम्मेदार विभाग “जल्द काम पूरा होने” का भरोसा दे रहे हैं।
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