: गरीबों का ‘सहारा’ बनी कर्म क्रांति सेवा फाउंडेशन की रसोई, मुफ्त में मिलता है भूखों को भरपेट भोजन
Mon, Jun 9, 2025
138वें निःशुल्क भोजन वितरण में शहर कोतवाल अवनीश सिंह पुलिस टीम के साथ पहुंचे
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान✍️
उन्नाव। उत्तर प्रदेश का जिला उन्नाव में एक ऐसी संस्था है जो गरीब, असहाय लोगों को समय पर खाना देने का कार्य तीन वर्षों से कर रही है। स्टेशन परिसर में प्रत्येक सोमवार की दोपहर 1 बजे कर्म क्रांति सेवा फाउंडेशन द्वारा संचालित अन्नपूर्णा रसोई के द्वारा बच्चों, गरीब, असहाय, बेबस, लाचार, दैनिक मजदूर, ऑटो, ठेला, रिक्शा चालक एवं आमजनों के लिए नि:शुल्क भोजन वितरण चलाया जाता है। यहां उन्हें पेट भर भोजन कराया जाता है। और हर बार भोजन बदल बदल कर ही परोसा जाता है। इस सोमवार को यानि आज सदर कोतवाली प्रभारी अवनीश कुमार सिंह वह उनकी टीम पहुंची जहां 138वें निःशुल्क भोजन वितरण ने सेवा की और संस्था की प्रशंसा करते हुए इस कार्य को नर सेवा नारायण सेवा का रूप बताया कोतवाल अवनीश सिंह ने सभी सदस्यों से मिलकर उनकी तारीफ भी की। वहीं कोतवाली परिसर में मंगलवार को आयोजित होने वाले विशाल भंडारे का आमंत्रण पत्र चेतन मिश्रा के हाथ में सौंपते हुए सभी को आमंत्रित भी किया।
बातचीत के दौरान संस्थापक चेतन मिश्रा ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से प्रत्येक सोमवार को गरीब, असहाय, रिक्शा चालक, ऑटो चालक एवं आम जनों के लिए “अन्नपूर्णा रसोई” चलाई जा रही है। इस सोमवार को भी जरुरतमंद 200 लोगों को भरपेट भोजन व छाछ हमारे रसोई परिवार के सदस्यों की तरफ से खिलाया गया।
इंसानियत की मिसाल बने चेतन
समझने वाली बात है कि कुछ लोग शौक से खाना बनाते हैं तो कुछ लोगों का पेशा ही खाना बनाना होता है, कुछ लोगों को खाना बनाने के साथ- साथ नए-नए व्यंजन खाना भी पसंद होता है। लेकिन हर किसी के नसीब में दो वक्त की रोटी नहीं लिखी होती। आज भी हमारे देश में बहुत से ऐसे परिवार हैं जो लोग रोज भूखे सोते हैं,बेसहारा,असहाय लोगों की भुखमरी खत्म करने के लिए सरकार भी कोई ठोस कदम नहीं उठाती हैं। लेकिन कभी-कभी ऐसा लगता है कि अभी भी कुछ लोगों में इंसानियत बाकी है। एक ऐसी ही इंसानियत की मिसाल हैं। इसी इसांनियत की मिसाल कर्म क्रांति सेवा फाउंडेशन के संस्थापक चेतन मिश्रा व उनके सहयोगीगण बने हुए है। जिसकी चर्चा आसपास के जिलों में भी हो रही है।
सहयोग की अपील की
संस्था का कहना है कि समाज के हर वर्ग को इसके साथ जोडऩे का प्रयास निरंतर किया जा रहा है। और लोगों से अपील की जाती है अपने प्रियों के जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ, घर में बजुर्गों की पुण्यतिथि के दिन कर्म क्रांति सेवा फाउंडेशन की रसोई में आकर आर्थिक सहयोग के साथ-साथ सेवा कार्य कर पुण्य के भागीदार बने ।
संस्था के संस्थापक चेतन मिश्रा ने कहा भूखे को भोजन कराना एक यज्ञ के समान है। इस महान कार्य से एक तो पुण्य के भागीदार बनते हैं और दूसरा आत्मिक शांति मिलती है। इसी सोच के साथ दिन-रात जुटी है संस्था क्षेत्रीय अस्पतालों में उपचार के लिए हर रोज पहुंचने वाले सैकड़ों रोगियों व उनके साथ आए तीमारदारों को नि:शुल्क भोजन उपलब्ध करवाना चाहती है। लेकिन संस्था का मानना है कि इस महान कार्य में सभी दानवीरों को आगे आकर हिस्सा लेना होगा तभी इस तरह का आयोजन विधिवत चलाया जा सकेगा।
कर्म क्रांति सेवा फाउंडेशन के द्वारा गरीबों व जरूरतमंदों की सेवा के लिए जरूरत की चींजें उपलब्ध कराने के लिए संस्था के हर सदस्य का आर्थिक योगदान रहता है। इस संस्था में सैकड़ों लोग जुड़े हैं जिनमे से कोई सरकारी पद पर है तो कोई व्यापारी है। जिसको जैसे बनता है वह इस संस्था में आर्थिक व शारीरिक योगदान देता है।
चेतन ने कहा कि गरीब को दान करना व भूखे को खाना खिलाना ही भगवान की असली भक्ति है। भगवान की भक्ति करने का सही तरीका यह हैं कि आप किसी को गलत नहीं बोलें न ही किसी का गलत करें। चेतन मिश्रा का कहना है कि जो लोग दान करना चाहे तो वह संस्था को कॉल या व्हाट्सप्प के माध्यम से भी सम्पर्क कर सकते है। या जो लोग गुप्त सहयोग करना चाहते है वह संस्था के बैंक अकाउंट या QR कोड से भी सहयोग कर सकते है। अगर किसी भी दान दाता हमसे व्हाट्सप्प नंबर
+91-7518759176
से संपर्क कर सकता है या कार्यालय से रसीद प्राप्त कर सकते है।
ये लोग रहे मौजूद
आज के इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से संस्था के सेवकों में फौजी अजय कुमार द्विवेदी, नीरज श्रीवास्तव, फौजी संजय कुशवाहा , अध्यापक अंबुज मिश्रा, फौजी संजय सिंह, मो. दानिश, रवि वर्मा, बसंत के साथ महिला मोर्चा टीम की नीतू तिवारी, तनु पांडे, रेनू वर्मा, आरती वर्मा, सरिता शुक्ला, वैशाली शर्मा आदि लोगों ने भाव से सेवा कार्य को संपन्न करवाया। वहीं समय निकाल कर आए सदर कोतवाली प्रभारी अवनीश कुमार सिंह व पुलिस टीम के अलावा समाजसेवी सज्जनों का कर्म क्रांति सेवा फाउंडेशन के संस्थापक चेतन मिश्रा ने आभार व्यक्त किया l
: सज गई बकरों की मंडी, दिख रही खरीदारों की भीड़
Wed, Jun 4, 2025
बकरीद की तैयारियां शुरू, 7 जून को होगी कुर्बानी
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान✍️
उन्नाव। ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार 7 जून शनिवार को मनाया जाएगा। वहीं, बकरीद की कुर्बानी को लेकर शहरभर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। बाजारों में चहल-पहल तेज हो गई है। शहर के किला बाजार में बुधवार को कुर्बानी के जानवरों की खरीदारी के लिए भीड़ देखने को मिली। साथ ही धवनरोड पर लोग नए कपड़ों की खरीदारी करते दिख रहे हैं।
पशु विक्रेताओं ने बताया कि वे कई वर्षों से इस मौके पर बाजार में बकरों की बिक्री करते आ रहे हैं। इस वर्ष भी वे कुर्बानी के लिए 12 हजार से 25 हजार रुपये तक के जानवर लेकर आए हैं। उन्होंने बताया कि खरीदार लगातार आ रहे हैं और पूछताछ करने के बाद खरीदारी भी कर रहे हैं। विक्रेता रामनरेश और मो. शाकिब ने बताया कि ग्राहक आमतौर पर बड़े और भारी बकरों की डिमांड लेकर आ रहे हैं। अधिकतर खरीदार कम दाम में ज्यादा वजन वाले जानवर की तलाश करते हैं।
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शहर काज़ी: मौलाना निसार अहमद मिस्बाही
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उधर, शहर काज़ी मौलाना निसार अहमद मिसबाही ने बताया कि ईद-उल-अजहा (बकरीद) हमें उन कुर्बानियों की याद दिलाती है जो अल्लाह के बरगुज़ीदा नबी हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह के हुक्म की तामील में पेश की थीं। उन्होंने कहा कि बकरीद के दिन दुनिया भर के मुसलमान अपने माल, जान, ख्वाहिशों और मफ़ादात को अल्लाह की रज़ा के लिए कुर्बान करने का जज्बा अपनाते हैं। यह मुकद्दस त्योहार केवल कुर्बानी का नहीं, बल्कि आपसी मोहब्बत, भाईचारा, बराबरी का भी पैगाम देता है। उन्होंने अपील की कि बकरीद के मौके पर जिला प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइंस का पूरी तरह से पालन किया जाए।
: आवारा पशुओं की लड़ाई में युवक को गंवानी पड़ी अपनी जान, कौन जिम्मेदार ?
Sat, May 31, 2025
छुट्टा पशुओं को घूमने की कवायद कागजी,
सड़कों पर घूम रहें
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान ✍️
उन्नाव। शहर में घूम रहे आवारा पशु मानव जीवन के लिए खतरा बने हुए है, लेकिन इस खतरे को जिम्मेदार भांप नहीं रहे। ऐसे में रोज हादसे हो रहे है। जिम्मेदारों की इस लापरवाही के चलते आज यानि शनिवार को एक व्यक्ति की जान चली गई। दिल दहलाने वाले हमले का वीडियो भी सोशल मीडिया में सामने आया है। जिसके बाद लोगों में प्रशासन के प्रति नाराज़गी और चिंता सताने लगी है। घटना शहर के मोहल्ला गांधी नगर के पास की है, जहां दो पशुओं की लड़ाई में सदर कोतवाली क्षेत्र के गांधीनगर निवासी सुशील बाजपेयी (40) पुत्र सतीश बाजपेयी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिला अस्पताल में सुशील को भर्ती करवाया, जहां इलाज के दौरान सुशील की मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा कराकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
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पूरा मामला
जानकारी के अनुसार शनिवार दोपहर को सुशील अपने भतीजे शुभम के साथ किसी काम से गुजर रहे थे। तभी दो पशुओं की लड़ाई में से एक गाय ने उनपर अचानक से हमला कर दिया। जबतक सुशील खुद को बचाते गुस्सायी पशु ने उनको कई बार पटका व पैरों से कुचल दिया। इसी बीच भतीजे ने सुशील को बचाने की कोशिश किया तो गुस्साए पशु ने उस पर भी हमला करके घायल कर दिया। चीख पुकार की आवाज से आए क्षेत्रवासियों ने किसी तरह पशु को वहां से भगाया। और एंबुलेंस बुलाकर सुशील को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। गंभीर हालत में पहुंचे सुशील की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही जिला अस्पताल पहुंचें परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। अस्पताल प्रशासन ने घटना की जानकारी पुलिस को दी कोतवाली प्रभारी अवनीश सिंह ने बताया कि शव का पंचनामा करवा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
परिजनों का रो रोकर बुरा हाल
मृतक की पत्नी रागनी के मुताबिक उसका पति फेरी लगाकर कपड़े बेचने का काम करते थे। उसका एक बेटा अंकित है। इधर, परिजनों और क्षेत्रीय लोगों में छुट्टा घूम रहे पशुओं के प्रति पालिका प्रशासन और स्थानीय के खिलाफ काफी गुस्सा है। क्षेत्रवासियों ने स्थानीय प्रशासन से आवारा पशुओं को पकड़ने की मांग भी की है।
जिम्मेदार कौन
ऐसे में सवाल उठता है, इस सुशील की मौत का जिम्म्दार कौन है? शायद ही किसी के पास इसका कोई जवाब होगा। दरअसल शहर में जगह-जगह आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा हुआ है। हर दिन भरे बाजार में पशुओं की लड़ाई में नुकसान हो रहा है, यहां तक की लोग इस लापरवाही के शिकार हो रहे है। कई बार आवारा पशु लड़ते-लड़ते दुकान या प्रतिष्ठान में घुस जाते है। जिससे न केवल नुकसान होता है बल्कि यातायात भी पूरी तरह बाधित हो जाता है। इतना सब होते हुए भी प्रशासन द्वारा इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। पिछले लंबे समय से शहर में आवारा पशुओं को पकड़ा नहीं जा रहा, जिसके कारण शहर में आवारा पशुओं की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। प्रशासन की इस लापरवाही के चलते आए दिन खुल्ला घूम रहे पशुओं से कोई न कोई शिकार हो रहे है।
प्रशासन के दावे सिर्फ काग़जी
यह छुट्टा पशु किस पर हमला कर दें यह किसी को अंदाजा नहीं होता। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से भी इन पशुओं को संरक्षित करने के आदेश दिए जा चुके है। लेकिन जिला प्रशासन की ओर से छुट्टा पशुओं को गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित करने के दावे सिर्फ कागजी निकले। अभी भी शहर के सड़कों व अन्य जगहों पर छुट्टा पशु लोगों की जान के दुश्मन बने हुए है। इनके कारण पहले भी कई बार हादसे भी हो चुके है।