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दिल्ली-NCR पर 'गंभीर' प्रदूषण का अटैक : हवा जहरीली, लोग परेशान, क्या GRAP-IV भी होगा फेल?

THE LUCKNOW TIMES

Sun, Nov 9, 2025
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नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे सटे NCR क्षेत्र में वायु प्रदूषण का संकट एक बार फिर 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में पहुंच गया है, जिससे लाखों लोगों का दम घुट रहा है। कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) का स्तर 400 के पार बना हुआ है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक माना जाता है। इस जहरीली हवा ने न केवल दैनिक जीवन को प्रभावित किया है, बल्कि सरकार और प्रशासन के प्रदूषण नियंत्रण उपायों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

🚨 प्रदूषण की 'गंभीर' स्थिति

ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कई प्रमुख मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI 420 से 450 के बीच रिकॉर्ड किया गया है। यह स्थिति उस समय है जब सरकार ने प्रदूषण के सबसे कड़े चरण ग्रैप-IV (GRAP-IV) के कई प्रतिबंधों को लागू कर दिया है। हवा में PM 2.5 और PM 10 कणों की मात्रा सामान्य सीमा से कई गुना अधिक हो गई है। यह उच्च प्रदूषण स्तर मुख्य रूप से वाहनों के उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियों, निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध की अनदेखी और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं के कारण बना हुआ है।

🛑 GRAP-IV का असर शून्य?

प्रदूषण नियंत्रण के लिए बनाए गए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत, जब AQI 400 के पार जाता है, तो GRAP-IV के प्रावधान लागू हो जाते हैं। इसके तहत, आवश्यक सेवाओं को छोड़कर, ट्रकों के प्रवेश पर रोक, BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल कारों पर रोक, और सभी निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों पर प्रतिबंध शामिल हैं। हालांकि, इन सख्त उपायों के बावजूद, हवा की गुणवत्ता में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रतिबंधों का कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है, जिससे ये केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह गए हैं।

😷 लोगों पर स्वास्थ्य संकट जहरीली हवा के कारण

दिल्ली-एनसीआर के निवासियों को साँस लेने में कठिनाई, आँखों में जलन, गले में खराश और खाँसी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा व फेफड़ों के मरीजों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। चिकित्सकों ने लोगों को एन-95 मास्क पहनने, घर के अंदर रहने और बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी है।

🛣️ आगे की राह और चुनौतियां

प्रदूषण से निपटने के लिए सरकारें लगातार प्रयास कर रही हैं, जिसमें कृत्रिम बारिश (Artificial Rain) कराने पर विचार और एंटी-स्मॉग गन का उपयोग शामिल है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक पराली जलाने की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, और सख्त कानून व्यवस्था लागू नहीं की जाती, तब तक हर साल इस संकट से जूझना पड़ेगा। दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच समन्वय की कमी भी इस समस्या को बढ़ा रही है। आज प्रदूषण नियंत्रण एक तात्कालिक कार्य नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन का विषय बन गया है।

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