मकर संक्रांति स्नान को लेकर गंगा पर पहरा : प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के सभी रास्ते सील
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Mon, Jan 12, 2026
12 से 15 जनवरी तक पूर्ण बंदी, मौनी अमावस्या पर भी लागू
उन्नाव। माघ मेले के दौरान गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। 15 जनवरी को होने वाले प्रमुख स्नान को ध्यान में रखते हुए रविवार रात स्लाटरों और टेनरियों से गंगा की ओर जाने वाले सभी रास्तों को पूरी तरह बंद करा दिया गया। इससे अब उद्योगों से निकलने वाला कोई भी गंदा पानी नदी तक नहीं पहुंच सकेगा। यह व्यवस्था 12 जनवरी की रात से लागू होकर 15 जनवरी की रात तक प्रभावी रहेगी। प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मकर संक्रांति पर दूसरे प्रमुख स्नान में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा में आस्था की डुबकी लगाएंगे। श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन ने पहले ही निर्देश जारी कर दिए थे कि प्रमुख स्नान से पहले गंगा में गिरने वाले सभी नालों को बंद किया जाए और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की गतिविधियों पर रोक लगाई जाए। बंदी रोस्टर के तहत प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम ने रविवार रात कार्रवाई करते हुए टेनरियों स्लाटरों और सीईटीपी के पानी छोड़ने वाले मुहानों को सील करा दिया। क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी शशि बिंदकर ने बताया कि बंदी की अवधि में किसी भी इकाई को प्रदूषित जल बाहर छोड़ने की अनुमति नहीं है। आदेशों की अनदेखी करने वाले उद्योग संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मौनी अमावस्या पर भी रहेगा नियंत्रण
माघ मेले में मौनी अमावस्या पर 18 जनवरी को तीसरा विशेष स्नान होगा। इसके मद्देनजर 15 जनवरी की रात से 18 जनवरी तक तीन दिन की अतिरिक्त बंदी लागू की गई है। इस दौरान टेनरियों में उत्पादन पूरी तरह ठप रहेगा और गंदा पानी छोड़ने वाले उद्योगों व सीईटीपी के सभी रास्ते बंद रहेंगे। प्रशासन का कहना है कि गंगा की शुद्धता बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए पूरे समय कड़ी निगरानी रखी जा रही है और नियमों के पालन में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
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