सड़कों पर आवारा कुत्तों का बढ़ता डर : हर मोड़ पर घूमते ‘खतरे के साये’
Sun, Nov 9, 2025
कागजों में शेल्टर, सड़कों पर आतंक—कुत्तों पर लगाम नहीं कस सका प्रशासन
उन्नाव। शहर की सड़कों और गलियों में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। मोहल्ले हों या बाजार, हर जगह कुत्तों के झुंड घूमते नजर आते हैं। हालत यह है कि लोग सुबह-शाम घर से निकलते वक्त डर महसूस करने लगे हैं। बच्चे खेलते समय असुरक्षित हैं, बुजुर्ग टहलने से कतराने लगे हैं। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, बस अड्डों, खेल परिसर और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों व मवेशियों को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने स्थानीय निकायों को आठ हफ्तों के भीतर इन्हें सुरक्षित आश्रय गृहों में रखने का निर्देश दिया है। लेकिन उन्नाव में हकीकत इससे बिलकुल उलट है।
गलियों में झुंड, रोज़ किसी न किसी पर हमला
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों से हर दिन कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। नगर पालिका के पास न तो इनकी गणना का सही आंकड़ा है और न पकड़ने की कोई ठोस व्यवस्था। शिकायतों पर कभी-कभार कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन असर नजर नहीं आता। पिछले एक सप्ताह में जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में 509 लोग कुत्तों के काटे जाने के मामलों में पहुंचे हैं। अस्पतालों में एंटी रेबीज़ इंजेक्शन तो उपलब्ध हैं, पर लंबी कतारें और अव्यवस्था से मरीजों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
आदेश जारी, लेकिन अमल नहीं
15 जून 2023 को तत्कालीन प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने सभी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को अपने क्षेत्र में डॉग केयर सेंटर बनाने के निर्देश दिए थे। आदेश में स्पष्ट था कि बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए कुत्तों को शेल्टर में रखकर उनकी देखभाल की जाए। लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी जिले की किसी भी निकाय में एक भी डॉग केयर सेंटर नहीं बन सका। अधिकारी हर बार यही कहकर बच निकलते हैं कि “स्थान चिन्हित किया जा रहा है।”
“
पकड़ो और छोड़ दो” नीति से नहीं थम रहा डर
नगर पालिका समय-समय पर कुत्ते पकड़ने का अभियान चलाने का दावा करती है, लेकिन हकीकत में यह अभियान सिर्फ दिखावा बनकर रह जाता है। कुत्तों को पकड़कर शहर के बाहर छोड़ा जाता है और कुछ ही दिनों में वही झुंड दोबारा गलियों में लौट आते हैं।
एक दिन में 37 लोग हुए थे शिकार
सफीपुर में 6 सितंबर 2024 को एक पागल कुत्ते ने बारह से ज्यादा मोहल्लों में आतंक मचा दिया था। कुछ ही घंटों में 37 लोग उसके हमले में घायल हुए थे। किसी की बांह पर काटा, किसी के पैर में दांत गड़ा दिए। यह घटना आज भी लोगों की यादों में दहशत की तरह बस गई है।
हाईवे और एक्सप्रेस-वे भी नहीं सुरक्षित
सिविल लाइन, सब्जी मंडी, स्टेशन रोड और नगर पालिका रोड जैसे इलाकों में कुत्तों का झुण्ड साफ देखा जा सकता है। शहर ही नहीं, लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेस-वे और अन्य राजमार्गों पर भी आवारा मवेशियों और कुत्तों की वजह से हादसे बढ़ रहे हैं। रात में सड़क पार करते वक्त अचानक झुंड आ जाने से वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।
गोवंश के लिए बजट, कुत्तों के लिए कुछ नहीं
जिले में 322 गौशालाओं में 36 हजार गोवंश की देखभाल के लिए हर साल करोड़ों का बजट जारी होता है। लेकिन आवारा कुत्तों के लिए न तो कोई स्थायी फंड है, न भोजन या देखभाल की व्यवस्था। यही वजह है कि शेल्टर निर्माण की फाइल हर साल “प्रक्रिया में” बताकर दबा दी जाती है।
जिम्मेदारों का जवाब
एडीएम निकाय प्रभारी अमिताभ यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कराने के लिए सभी नगर निकायों को निर्देश दिए गए हैं और शेल्टर निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
नगर पालिका ईओ
एस.के
. गौतम ने बताया कि आश्रय गृह बनाने के निर्देश मिले हैं, प्रक्रिया जारी है। जहां से शिकायत मिलती है, वहां टीम भेजकर कुत्तों को पकड़ा जाता है।
एसीएमओ डॉ.
एच.एन
. प्रसाद ने बताया कि सभी अस्पतालों में एंटी रेबीज़ इंजेक्शन की पर्याप्त व्यवस्था है। सीएचसी और पीएचसी प्रभारियों को जरूरत के अनुसार डिमांड भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
लोगों का सवाल है—आखिर कब थमेगा यह डर?
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और प्रशासनिक दावों के बीच हकीकत यह है कि शहर की सड़कों पर हर दिन कोई न कोई घायल हो रहा है। जब तक शेल्टर हाउस नहीं बनते और कुत्तों को व्यवस्थित तरीके से नहीं रखा जाता, तब तक “आवारा कुत्तों का आतंक” लोगों के लिए रोज़ की मुसीबत बना रहेगा।
चांदपुर में नकली खाद बेचने वालो का भंडाफोड़ : 50 रुपये की खाद 1350 में बेच रहे थे कारोबारी
Sun, Nov 9, 2025
दही पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 234 बोरी बरामद, कई मजदूर और चालक पकड़े गए, संचालक फरार
उन्नाव। किसानों की जेब काटने वाला बड़ा खेल शुक्रवार की रात बेनकाब हुआ। जिला कृषि अधिकारी शशांक कुमार और दही थाना प्रभारी अवनीश कुमार सिंह ने संयुक्त छापेमारी में चांदपुर गांव के एक टिनशेड बने गोदाम से नकली खाद बनाने का गोरखधंधा पकड़ा। गोदाम में मजदूर सफेद बिना नाम की बोरियों से खाद निकालकर इफ्को डीएपी लिखी बोरियों में भर रहे थे और मशीन से सिलाई कर लोडरों में लाद रहे थे। टीम के पहुंचते ही वहां अफरातफरी मच गई। मौके से दो लोडर, उनके चालक और छह मजदूर पकड़े गए, जबकि इस धंधे का संचालक मौके से फरार हो गया। जांच में 234 बोरी नकली खाद, सिलाई मशीन, धागा और भारी मात्रा में खाली बोरियां बरामद की गईं।
डीएपी के नाम पर बिक रही थी नकली खाद
सूत्रों के मुताबिक, चमड़े की कतरन और रेत मिलाकर 50 रुपये में तैयार होने वाली यह नकली खाद इफ्को ब्रांड की बोरियों में भरकर 1350 रुपये प्रति बोरी बेची जा रही थी। बताया जा रहा है कि इस गिरोह की जड़ें जिले के कई हिस्सों तक फैली हैं। मुख्य संचालक कन्हई खेड़ा के पास किसी गांव में छिपकर यह काम कर रहा है और अन्य जगहों पर भी सप्लाई करता है।
डीएम बोले – पूरा गिरोह पकड़ा जाएगा
डीएम गौरांग राठी ने कहा कि जांच गहराई से कराई जा रही है। इस धंधे में जो भी शामिल होंगे, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
चालकों और मजदूरों से पूछताछ
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि पकड़े गए चालकों और मजदूरों से पूछताछ की जा रही है, लेकिन वे संचालक का नाम नहीं बता पाए। पकड़े गए लोगों में अजगैन निवासी बृजेश कुमार, नवाबगंज के बरदही निवासी राजेंद्र लोधी, गांधीनगर के प्रिंस राजपूत, राजकुमार उर्फ कल्लू चौरसिया, अभिराज कुशवाहा, राजेश लोधी, शिवम वर्मा और रोहित बारी शामिल हैं। सभी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है।
गोदाम को सील कर सैंपल भेजे गए
बरामद खाद की बोरियों को सील कर गोदाम में ही रखवा दिया गया है। सैंपल लैब में भेजे गए हैं। प्रथम दृष्टया यह डीएपी जैसी नजर आ रही थी, लेकिन पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। गोदाम मालिक और पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। लोडरों की जांच में एक का मालिक भगवंतपुर निवासी बउवा साहू बताया जा रहा है। पुलिस ने उसके बारे में भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस खुलासे के बाद पुलिस, कृषि और प्रदूषण विभाग की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक दही थाना क्षेत्र में कई छोटी-बड़ी खाद बनाने वाली छोटे छोटे प्लांट चल रहे हैं, जिन पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी बेहद कमजोर है। रासायनिक अपशिष्ट खुले में फेंके जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण और जलस्रोत दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
अब यह संदेह गहराता जा रहा है कि कहीं इन्हीं फैक्ट्रियों से मिलावट का यह खेल तो नहीं चल रहा? चर्चा है कि सभी फैक्ट्रियों की जांच कराई जाए और जो भी इस अवैध कारोबार में शामिल मिले, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। फिलहाल जांच जारी है, लेकिन इस पूरे मामले ने जिले की प्रशासनिक कार्यशैली और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डीएम गौरांग राठी ने देखा : वोटर लिस्ट पुनरीक्षण अभियान का हाल
Sat, Nov 8, 2025
तीन बार जाकर दें फॉर्म, ताकि कोई मतदाता न छूटे – जिलाधिकारी
उन्नाव। जिलाधिकारी गौरांग राठी ने शनिवार को विधानसभा सदर क्षेत्र में चल रहे विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान का जायजा लिया। उन्होंने बूथ संख्या 164, कल्याणी देवी पर पहुंचकर बीएलओ द्वारा किए जा रहे गणना प्रपत्र वितरण कार्य की बारीकी से जांच की। निरीक्षण के दौरान डीएम ने खुद मतदाताओं को अपने हाथों से गणना प्रपत्र वितरित किए और लोगों से अपील की कि वे सही-सही जानकारी भरकर समय पर बीएलओ को वापस करें। उन्होंने कहा कि हर घर तक प्रपत्र पहुंचना चाहिए, किसी भी स्थिति में लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
डीएम ने निर्देश दिया कि अगर किसी घर के दरवाजे बंद हों, तो भी गणना प्रपत्र वहां अवश्य छोड़ा जाए। बीएलओ को यह भी हिदायत दी कि वे कम से कम तीन बार मौके पर जाकर यह सुनिश्चित करें कि कोई मतदाता छूट न जाए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। अपात्र व्यक्ति न जुड़ें और पात्र मतदाता न छूटें, इस पर पूरी सतर्कता बरती जाए डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान तहसीलदार सदर सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि अभियान के तहत जिले के सभी मतदान केंद्रों पर मतदाता सूची के संशोधन और सत्यापन का काम तेजी से जारी है।