: ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ संदेश के साथ अपर्णा यादव का उन्नाव दौरा
Wed, Oct 8, 2025
वन स्टॉप सेंटर में सेवाओं की समीक्षा, माताओं को दी उपहार किट
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
उन्नाव। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव बुधवार को जिले के दौरे पर पहुंचीं। उन्होंने जिला अस्पताल परिसर स्थित वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण किया और वहां आयोजित ‘कन्या जन्मोत्सव कार्यक्रम’ में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुईं। इस मौके पर उन्होंने नवजात कन्याओं और उनकी माताओं को उपहार किट देकर उनके सुखद और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
अपर्णा यादव का यह दौरा महिला आयोग के निरीक्षण और समीक्षा अभियान का हिस्सा था। वन स्टॉप सेंटर में पहुंचकर उन्होंने अस्पताल स्टाफ और अधिकारियों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने महिलाओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं, सुरक्षा इंतजामों और शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी ली। केंद्र का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने आवश्यक सुधार के निर्देश दिए और कहा कि महिलाओं को हर स्तर पर मदद और सुरक्षा मिलनी चाहिए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपाध्यक्ष ने कहा कि ‘कन्या जन्मोत्सव’ का उद्देश्य समाज में बेटियों के जन्म को उत्सव की तरह मनाना और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि बेटियां केवल घर की जिम्मेदारी नहीं हैं, बल्कि समाज की रीढ़ और देश की शक्ति हैं। उनकी शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान ही वास्तविक प्रगति का आधार है।
अपर्णा यादव ने जिला अस्पताल प्रशासन और वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह केंद्र महिलाओं के लिए सहायता और परामर्श का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी पीड़िता को सहायता प्राप्त करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए।उन्होंने महिलाओं से अपील की कि महिला हेल्पलाइन 181, आपातकालीन सेवा 112, महिला पावर लाइन 1090 और चाइल्ड लाइन 1098 जैसी सेवाओं का लाभ जरूर उठाएं। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है, जिनकी जानकारी हर जरूरतमंद तक पहुंचनी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान उपाध्यक्ष ने नवजात बेटियों की माताओं से बातचीत की और उन्हें ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जब बेटियां आगे बढ़ेंगी, तभी समाज और राष्ट्र सशक्त होगा। इस अवसर पर सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डीपीओ, अस्पताल अधीक्षक, और वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी समेत कई अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के समापन पर उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने कहा कि महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी है।
: पुलिस लाइन में महिला सशक्तिकरण का संदेश देती दौड़
Wed, Oct 8, 2025
सोनम सिंह बोलीं—महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना ही मिशन शक्ति का असली मकसद
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
उन्नाव। रिजर्व पुलिस लाइन में बुधवार को “रन फॉर एम्पावरमेंट” कार्यक्रम बड़े उत्साह के साथ आयोजित किया गया। मिशन शक्ति अभियान के तहत हुई इस मैराथन दौड़ का मकसद था—महिलाओं और बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाना, उन्हें सशक्त बनाना और समाज में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना।
सुबह से ही पुलिस लाइन परिसर में जोश और ऊर्जा का माहौल था। पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी अखिलेश सिंह और क्षेत्राधिकारी सफीपुर सोनम सिंह ने हरी झंडी दिखाकर मैराथन को रवाना किया। “रन फॉर एम्पावरमेंट” के नारों के साथ जब महिला आरक्षियों और छात्राओं की टोली सड़क पर उतरी, तो शहर की फिज़ा में जागरूकता का संदेश गूंज उठा।
इस दौड़ में पुलिस लाइन की महिला आरक्षियों के अलावा जिले के कई विद्यालयों की छात्राओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। दौड़ के दौरान लोगों ने सड़कों के किनारे खड़े होकर प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाया। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
दौड़ पूरी होने के बाद क्षेत्राधिकारी सोनम सिंह ने सभी प्रतिभागियों को पोषाहार वितरित किया और उन्हें प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना ही मिशन शक्ति अभियान का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि समाज में महिलाएं अगर सजग और आत्मविश्वासी रहेंगी, तो अपराध खुद-ब-खुद कम होंगे।
सोनम सिंह ने बालिकाओं और महिलाओं को आपात स्थिति में तुरंत सहायता लेने के लिए हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। उन्होंने महिला पावर लाइन 1090, महिला हेल्पलाइन 181, आपात सेवा 112, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076, चाइल्ड लाइन 1098, एम्बुलेंस सेवा 108, स्वास्थ्य सेवा 102 और साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 के उपयोग के बारे में विस्तार से बताया।
इस मौके पर प्रतिसार निरीक्षक अब्दुल रशीद समेत पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे। पुलिस लाइन परिसर में महिला सशक्तिकरण से जुड़े पोस्टर और बैनर लगाए गए, जिनसे लोगों को सुरक्षा और सम्मान के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में शामिल छात्राओं ने बताया कि ऐसे आयोजनों से उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे समाज में अपनी भूमिका को लेकर और जागरूक होती हैं। मैराथन सिर्फ एक दौड़ नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण का संदेश लेकर शहर की गलियों से गुज़री।
: उन्नाव: फायर एनओसी के बिना चल रहे अस्पताल, कभी भी हो सकता बड़ा हादसा
Tue, Oct 7, 2025
जयपुर हादसे से नहीं ली सीख, उन्नाव के अस्पतालों में बरकरार खतरा
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
उन्नाव। जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में आग से सुरक्षा के इंतजाम बेहद लचर हैं। 71 सरकारी अस्पतालों में से केवल चार के पास ही अग्निशमन विभाग की एनओसी है, जबकि बाकी अब भी मानकों पर खरे नहीं उतर पाए हैं। निजी क्षेत्र में भी हालात अलग नहीं हैं—शहर के लगभग 150 नर्सिंग होम में 25 अब तक एनओसी हासिल नहीं कर सके हैं। कई ऐसे भी हैं जो बिना पंजीकरण और बिना अग्नि सुरक्षा के ही खुलेआम चल रहे हैं।
करोड़ों खर्च, फिर भी दो बार फेल
जिला महिला और पुरुष अस्पतालों में करोड़ों रुपये की लागत से फायर फाइटिंग सिस्टम लगाया गया। महिला अस्पताल में 1.89 करोड़ और पुरुष अस्पताल में 2.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए। सितंबर 2023 में शुरू हुआ यह काम अगस्त 2024 तक पूरा होना था, लेकिन मार्च 2025 में जाकर व्यवस्था तैयार हो सकी। मई और जून में अग्निशमन विभाग ने जब जांच की तो सिस्टम दो बार फेल हो गया। ऑटो मोड पर स्मोक सायरन बंद था, सेंसर खराब थे और नोजल गलत जगह लगा दिया गया था। सितंबर में तीसरे ट्रायल के बाद एनओसी जारी हुई, हालांकि जानकारों के मुताबिक अब भी कई सेंसर काम नहीं कर रहे हैं।
13 सीएचसी की फाइल लौटी
स्वास्थ्य विभाग ने जिले की 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए एनओसी मांगी थी। लेकिन जब अग्निशमन विभाग की टीम ने जांच की, तो मानक पूरे नहीं मिले। विभाग ने सभी फाइलें वापस करते हुए साफ कहा कि जब तक अग्नि सुरक्षा के सभी मानक पूरे नहीं होंगे, एनओसी नहीं दी जाएगी।
नर्सिंग होम में सबसे ज्यादा लापरवाही
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 150 नर्सिंग होम पंजीकृत हैं। इनमें से 125 को एनओसी मिल चुकी है, जबकि 26 के आवेदन खारिज किए गए हैं। कारण—पर्याप्त पानी टैंक, वेंटिलेशन और सुरक्षित निकास द्वार का न होना। जिले में दर्जनों नर्सिंग होम ऐसे भी हैं जो बिना फायर एनओसी और बिना पंजीकरण के ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
तीन साल पुराने दो ही अस्पताल सुरक्षित
बीघापुर और मौरावां में बने 100 बेड वाले अस्पतालों में आग से सुरक्षा के सभी मानक पूरे हैं। वहीं बाकी अस्पतालों में या तो उपकरण अधूरे हैं या सिस्टम खराब पड़ा है।
जयपुर हादसे के बाद भी नहीं सुधरे हालात
राजस्थान के जयपुर के ट्रॉमा सेंटर में हाल ही में आग लगने से आठ मरीजों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद भी उन्नाव के अस्पतालों ने सबक नहीं लिया। जिले के अधिकांश अस्पताल अब भी अग्नि सुरक्षा को औपचारिकता मानकर नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है।
एसएनसीयू में भर्ती 16 नवजात
जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू में 16 नवजात बच्चे भर्ती हैं। दो बेड वाले आईसीयू वार्ड में इस समय कोई मरीज नहीं है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अब फायर फाइटिंग सिस्टम पूरी तरह सक्रिय है और किसी भी आकस्मिक स्थिति में ऑटोमोड पर आग पर काबू पाया जा सकता है।
अग्नि सुरक्षा के मानक
हर मंजिल पर कम से कम एक स्मोक अलार्म होना चाहिए।।
धुआं निकासी के लिए पर्याप्त वेंटिलेशन जरूरी।
कार्बन मोनोऑक्साइड डिटेक्टर लगाया जाना चाहिए।
एक मीटर चौड़ा निकास मार्ग होना चाहिए।
भागने का दरवाजा बिना चाबी के खुलने योग्य होना चाहिए।
अस्पताल परिसर में धूम्रपान पूर्णतः प्रतिबंधित।
जिम्मेदारों का कहना
सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने कहा कि नर्सिंग होम के पंजीकरण के बाद सूची अग्निशमन विभाग को भेजी जाती है। जांच के बाद वहीं से एनओसी जारी होती है।
इधर,मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनूप सिंह ने बताया कि जो सूची सीएमओ कार्यालय से मिली, उसकी जांच कर एनओसी दी गई है। जिन फाइलों में कमियां पाई गईं, उन्हें लौटा दिया गया है। जब तक मानक पूरे नहीं होंगे, एनओसी जारी नहीं होगी।