ऑपरेशन मुस्कान : 101 गुमशुदा मोबाइल लौटे, चेहरे पर लौटी मुस्कान
Wed, Jan 28, 2026
सीईआईआर पोर्टल की मदद से बरामद हुए 21 लाख के मोबाइल, अब तक 1400 से ज्यादा की रिकवरी
उन्नाव। मोबाइल फोन गुम होने के बाद मायूसी झेल रहे लोगों के लिए पुलिस की पहल राहत लेकर आई है। दूरसंचार विभाग, संचार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विकसित सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से उन्नाव पुलिस ने 101 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को सौंप दिए। बरामद किए गए मोबाइलों की अनुमानित कीमत करीब 21 लाख रुपये बताई जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह के निर्देश पर जिले के सभी थानों में विशेष टीमें गठित की गई थीं। थानों पर प्राप्त होने वाली हर मोबाइल गुमशुदगी की शिकायत को प्राथमिकता के आधार पर सीईआईआर पोर्टल पर दर्ज कराया गया और तकनीकी निगरानी के जरिए उनकी तलाश शुरू की गई। एसएसपी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि गुमशुदा मोबाइल की बरामदगी में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी अखिलेश सिंह और अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी प्रेमचंद के पर्यवेक्षण में सर्विलांस सेल और जिले के सभी थानों की संयुक्त टीम ने इस अभियान को अंजाम दिया। सीईआईआर पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर अलग-अलग स्थानों से विभिन्न कंपनियों के एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई ऑपरेशन मुस्कान के तहत की जा रही है। मोबाइल गुमशुदगी की शिकायत मिलते ही संबंधित मोबाइल के आईएमईआई नंबर के आधार पर उसकी तकनीकी निगरानी शुरू कर दी जाती है। जैसे ही मोबाइल नेटवर्क पर सक्रिय होता है, उसकी लोकेशन ट्रेस कर टीम मौके पर पहुंचती है। इसी प्रक्रिया के चलते लगातार सफलता मिल रही है।
आंकड़े इस अभियान की मजबूती खुद बयां करते हैं। सितंबर 2024 से अब तक उन्नाव पुलिस की सर्विलांस टीम 707 से अधिक मोबाइल फोन बरामद कर चुकी है, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपये है। वहीं वर्ष 2025 में अब तक 700 से ज्यादा मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनकी कुल कीमत 4 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। इस प्रकार अब तक कुल 1400 से अधिक गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद किए जा चुके हैं।
बुधवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान बरामद 101 मोबाइल फोन उनके वास्तविक स्वामियों को सौंपे गए। अपने मोबाइल वापस पाकर लोगों के चेहरों पर राहत और खुशी साफ नजर आई। कई लोगों ने कहा कि मोबाइल गुम होने के बाद उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह दोबारा मिल पाएगा और इसके लिए उन्होंने उन्नाव पुलिस का आभार जताया।
इस सफल बरामदगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सर्विलांस टीम के कांस्टेबल शुभम तोमर, प्रशांत बालियान, अरुण यादव, सुदीप कटियार, आकाश चौधरी और विवेक को उनकी सराहनीय कार्यशैली और तकनीकी दक्षता के लिए प्रशंसा पत्र देने की घोषणा की गई है।
इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि गुमशुदा मोबाइल की बरामदगी से न केवल लोगों की व्यक्तिगत संपत्ति वापस मिलती है, बल्कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास भी मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल आज हर व्यक्ति की अहम जरूरत बन चुका है और ऐसे में उसे वापस दिलाना पुलिस की जिम्मेदारी है। एसएसपी ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन मुस्कान के तहत गुमशुदा संपत्ति की बरामदगी और लापता लोगों की तलाश आगे भी इसी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ जारी रहेगी। साथ ही उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि मोबाइल फोन गुम या चोरी होने की स्थिति में तुरंत संबंधित थाने में सूचना दें और सीईआईआर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर मोबाइल की बरामदगी सुनिश्चित की जा सके।
भरोसे का सौदा : नौकरी दिलाने के नाम पर 35 लाख की ठगी करने वाला गिरफ्तार
Wed, Jan 28, 2026
फर्जी दस्तावेज और झूठी पहचान के सहारे चलता रहा ठगी का खेल, कई पीड़ित आए सामने
उन्नाव। नौकरी दिलाने के नाम पर लाखो की ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को आसीवन थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को बड़े मेडिकल संस्थानों से जुड़ा बताकर बेरोजगारों को झांसे में लेता था और फर्जी नियुक्ति पत्र थमा देता था। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने अलग-अलग लोगों से कुल 35 लाख 20 हजार रुपये की ठगी की। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उन्नाव के निर्देश पर चलाए जा रहे अपराध विरोधी अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने लंबी जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दबोच लिया।
खुद को पीजीआई से जुड़ा बताया, लाखों ऐंठे
पुलिस के अनुसार, आसीवन क्षेत्र के गांव जारुल्लानगर निवासी मनोज कुमार पुत्र छेदीलाल ने 3 सितंबर 2024 को थाने में शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया कि लखनऊ निवासी मनोज कुमार नाम के व्यक्ति ने खुद को पीजीआई लखनऊ में असिस्टेंट डायरेक्टर के प्रशासनिक विभाग से जुड़ा बताया। उसने यह भी दावा किया कि उसकी पहुंच ऊंचे अधिकारियों तक है और वह आसानी से नौकरी लगवा सकता है। इसी भरोसे पर मनोज कुमार से 6 लाख रुपये लिए गए। बाद में आरोपी ने फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया। जब नौकरी ज्वाइन कराने की बात आई तो टालमटोल शुरू हो गई। जांच में सामने आया कि आरोपी ने सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई लोगों को इसी तरह ठगा।
कई पीड़ित, अलग-अलग रकम
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने रुपनारायण से 13 लाख रुपये, करुणा शंकर से 4.50 लाख रुपये, सुनील कुमार से 4 लाख रुपये, दिलीप वर्मा से 4 लाख रुपये और कमलेश से 3.70 लाख रुपये इस तरह कुल 35.20 लाख रुपये नौकरी लगवाने के नाम पर वसूले। सभी को पीजीआई लखनऊ से जुड़ा बताकर कूटरचित नियुक्ति पत्र दिए गए।
फर्जी दस्तावेज, असली ठगी
जांच में यह भी पता चला कि आरोपी शिक्षण संस्थानों से जुड़ा रहा है और इसी पहचान का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतता था। वह खुद को माइक्रोबायोलॉजी का प्रोफेसर और टीएस मिश्रा यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर बताता था। इसी प्रोफाइल के दम पर वह बेरोजगारों को अपने जाल में फंसाता था।
मेडिकल कॉलेज से गिरफ्तारी
थाना आसीवन थाना प्रभारी प्रदीप सिंह ने बताया कि आरोपी मनोज कुमार को सोहरामऊ थाना क्षेत्र स्थित प्रसाद मेडिकल कॉलेज से गिरफ्तार किया। इसके बाद उसे न्यायालय में पेश करके जेल भेज दिया। आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है।
पुलिस की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सरकारी या बड़े संस्थान में नौकरी के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें। किसी भी नियुक्ति पत्र या नौकरी के दावे की पहले संबंधित विभाग से पुष्टि जरूर करें, ताकि ऐसे ठगों के जाल में न फंसा जा सके।
यूजीसी कानून वापस लेने की मांग : बांगरमऊ में सवर्ण समाज ने जताया विरोध
Wed, Jan 28, 2026
कानून से अधिकारों के हनन का आरोप, सरकार से पुनर्विचार की मांग
उन्नाव। बांगरमऊ में बुधवार को यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण समाज के लोगों ने खुलकर नाराज़गी जताई। बड़ी संख्या में लोग तिकोनिया पार्क में जुटे और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारी कानून को तुरंत वापस लेने की मांग कर रहे थे। तिकोनिया पार्क से शुरू हुआ यह विरोध मार्च जुलूस के रूप में तहसील परिसर तक पहुंचा। पूरे रास्ते प्रदर्शनकारी यूजीसी कानून के खिलाफ आवाज बुलंद करते रहे। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन लोगों के तेवरों से साफ था कि समाज में इस मुद्दे को लेकर गहरा असंतोष है। किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस प्रशासन ने पूरे रूट पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की थी। तहसील पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने उपजिलाधिकारी ब्रजमोहन शुक्ला को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए सरकार से मांग की गई कि यूजीसी कानून को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि सरकार ने इस मांग को गंभीरता से नहीं लिया, तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और तेज किया जाएगा। उनका कहना था कि यह विरोध सिर्फ बांगरमऊ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिले और प्रदेश स्तर तक फैलाया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यूजीसी कानून सवर्ण समाज के अधिकारों को कमजोर करता है और इससे सामाजिक असंतुलन पैदा हो रहा है। उनका कहना है कि सरकार बिना सभी वर्गों से बातचीत किए ऐसे फैसले ले रही है, जिससे समाज में नाराजगी बढ़ रही है। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि किसी भी कानून को लागू करने से पहले सभी पक्षों की राय लेना जरूरी है, ताकि समाज में टकराव की स्थिति न बने। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने सरकार से संवाद का रास्ता अपनाने और यूजीसी कानून पर दोबारा विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाई गई, तो आने वाले दिनों में विरोध और व्यापक रूप ले सकता है।