दंगा नियंत्रण का मॉक ड्रिल : 300 पुलिसकर्मियों ने लिया हिस्सा
Tue, Feb 24, 2026
एएसपी उत्तरी अखिलेश सिंह की मौजूदगी में रबर बुलेट से टियर गैस तक अभ्यास
उन्नाव। किसी भी आकस्मिक हालात में कानून व्यवस्था बनाए रखने और आम लोगों को सुरक्षित माहौल देने के लिए मंगलवार को पुलिस लाइन परिसर में बड़े स्तर पर दंगा नियंत्रण का अभ्यास कराया गया। रिजर्व पुलिस लाइन के परेड ग्राउंड में यह मॉक ड्रिल वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुई, जिसमें करीब 300 अधिकारी, कर्मचारी और रिक्रूट आरक्षियों ने भाग लिया।यह अभ्यास के निर्देशन में और के नेतृत्व में आयोजित किया गया। मकसद साफ था, किसी भी अचानक भड़कने वाली स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल को पूरी तरह तैयार रखना।
भीड़ नियंत्रण के तरीके समझाए गए
ड्रिल के दौरान जवानों को अखिलेश सिंह ने बताया गया कि अगर कोई भीड़ कानून के खिलाफ व्यवहार करे या हालात बेकाबू हों तो किस क्रम में और किस तरह कार्रवाई करनी है। सबसे पहले समझाइश, फिर हल्का बल प्रयोग और जरूरत पड़ने पर तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल कैसे करना है, इस पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। मौके पर रबर बुलेट गन, एंटी राइट गन, टियर गैस गन, आंसू गैस के गोले, टियर स्मोक सेल और नेट जैसे उपकरणों का प्रदर्शन किया गया। जवानों को इन उपकरणों की कार्यप्रणाली, दूरी, दिशा और सुरक्षा मानकों के बारे में विस्तार से बताया गया, ताकि किसी भी कार्रवाई के दौरान अनावश्यक नुकसान न हो।
सावधानियां भी सिखाई गईं
एएसपी अखिलेश सिंह ने स्पष्ट किया कि भीड़ नियंत्रण में संयम सबसे अहम है। किस परिस्थिति में लाठीचार्ज किया जाए, कब आंसू गैस छोड़ी जाए और किन हालात में अन्य साधनों का उपयोग जरूरी हो, इस पर चरणबद्ध जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि कार्रवाई के दौरान आम नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना है। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों की भूमिका भी समझाई गई। अगर किसी स्थान पर आगजनी जैसी स्थिति बने तो पुलिस और दमकल विभाग किस तरह समन्वय के साथ काम करेंगे, इसका भी अभ्यास कराया गया।
रिक्रूट आरक्षियों के लिए खास प्रशिक्षण
ड्रिल में बड़ी संख्या में नए भर्ती हुए आरक्षियों ने भी हिस्सा लिया। वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें मौके की स्थिति को समझने, आदेश की प्रतीक्षा करने और टीम के साथ तालमेल बनाकर काम करने की सीख दी। एएसपी का कहना है कि ऐसे अभ्यास का मकसद केवल बल प्रयोग सिखाना नहीं, बल्कि स्थिति को बिगड़ने से पहले संभालने की क्षमता विकसित करना है। पुलिस का प्रयास है कि जिले में कानून व्यवस्था मजबूत रहे और लोगों को भयमुक्त वातावरण मिले। मॉक ड्रिल के अंत में अधिकारियों ने पूरे अभ्यास की समीक्षा की और जरूरी सुधार बिंदुओं पर चर्चा की, ताकि भविष्य में किसी भी चुनौतीपूर्ण हालात का सामना और बेहतर तरीके से किया जा सके।
एआई समिट में विरोध पर गरमाई सियासत : भाजपा महिला मोर्चा ने किया प्रदर्शन
Tue, Feb 24, 2026
कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर देश की छवि धूमिल करने का आरोप, कार्रवाई की मांग
उन्नाव। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'एआई समिट' के दौरान यूथ कांग्रेस के सदस्यों द्वारा टी-शर्ट खोलकर किए गए प्रदर्शन और हंगामे को लेकर देशभर में प्रदर्शन जारी है। इस घटना से आक्रोशित भाजपा महिला मोर्चा की महिलाएं मंगलवार को उन्नाव में भी जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस पार्टी और सांसद राहुल गांधी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के बाद सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा गया। शहर में आयोजित धरने में महिला मोर्चा की बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल रहीं। कार्यक्रम का नेतृत्व भाजपा जिलाध्यक्ष अनुराग अवस्थी और सदर विधायक पंकज गुप्ता ने किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रभक्ति के नारे लगाए और कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की गरिमा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सदर विधायक पंकज गुप्ता ने कहा कि एआई समिट जैसे आयोजन देश की तकनीकी क्षमता और वैश्विक पहचान को मजबूत करते हैं। ऐसे मंच पर कथित अशोभनीय प्रदर्शन निंदनीय है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक विरोध का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रसम्मान से जुड़ा विषय है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
भाजपा जिलाध्यक्ष अनुराग अवस्थी ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन उसकी मर्यादा होती है। अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में ऐसा व्यवहार देश की छवि को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी दल को ऐसी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, जिससे भारत की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचे।
महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष साधना दीक्षित ने कहा कि महिला कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर स्पष्ट संदेश दिया है कि राष्ट्र की अस्मिता के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भी इस प्रकार की घटनाएं दोहराई गईं तो संगठन व्यापक आंदोलन करेगा। ज्ञापन सौंपने वालों में साधना दीक्षित, प्रियंका शुक्ला, नगर मंडल अध्यक्ष अवनीश गुप्ता, मंजु अवस्थी, सुरुचि अग्निहोत्री, सरिता सिंह, श्रद्धा बाजपेयी, पुनीता दीक्षित, शोभा, रेणु, राम लाली दीक्षित, प्रीति शर्मा, सविता, ज्योति तिवारी, जयंती और दीप शिखा सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इंजेक्शन के बाद बिगड़ी तबीयत : 35 वर्षीय युवक की मौत
Tue, Feb 24, 2026
जांच करने पहुंची स्वास्थ्य टीम को बंद मिला क्लीनिक, नोटिस चस्पा
उन्नाव। एक मामूली इलाज के लिए गया 35 साल का युवक घर वापस नहीं लौटा। परिजनों का आरोप है कि गांव के एक निजी क्लीनिक में इंजेक्शन लगाने के कुछ ही देर बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ी और लखनऊ ले जाते समय रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। घटना के बाद से क्लीनिक संचालक और वहां काम करने वाला कंपाउंडर गायब बताए जा रहे हैं। मामला औरास क्षेत्र के रामपुर गढ़ौवा गांव स्थित आर्या पॉलीक्लीनिक का है। हिमाचलखेड़ा गांव निवासी विशुन (35) शनिवार को इलाज के लिए क्लीनिक पहुंचा था। परिजनों के मुताबिक, डॉक्टर ने उसे इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगते ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। हालत गंभीर देख परिवार वाले उसे तुरंत लखनऊ लेकर निकले, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। घटना से गुस्साए पिता रामखेलावन ने संबंधित डॉक्टर और कंपाउंडर के खिलाफ थाने में तहरीर दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दोनों आरोपियों की तलाश की जा रही है।सोमवार सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. अनूप तिवारी अपनी टीम के साथ जांच के लिए क्लीनिक पहुंचे। उनके साथ अजीत सिंह और अतीक भी मौजूद थे। लेकिन क्लीनिक पर ताला लटका मिला। टीम ने दरवाजे पर नोटिस चस्पा कर तीन दिन के भीतर जरूरी अभिलेख पेश करने को कहा है। डॉ. तिवारी ने बताया कि रिकॉर्ड देखने के बाद ही साफ हो सकेगा कि क्लीनिक विधिवत पंजीकृत है या नहीं। यदि कागजात नहीं मिले या नियमों का उल्लंघन पाया गया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उधर, थाना प्रभारी संजीव कुशवाहा ने बताया कि घटना के बाद से क्लीनिक संचालक और कंपाउंडर फरार हैं। पुलिस टीमें उनकी तलाश में लगी हैं। जल्द गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है।
बिना पंजीकरण क्लीनिकों पर सवाल
इस घटना ने औरास क्षेत्र में चल रहे निजी क्लीनिकों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शीशी चौराहा, भावाखेड़ा चौराहा, आलमखेड़ा चौराहा और रामपुर गढ़ौवा समेत कई जगहों पर बिना पंजीकरण के क्लीनिक धड़ल्ले से चल रहे हैं। यहां न तो स्पष्ट बोर्ड होते हैं, न डॉक्टरों की योग्यता की जानकारी सार्वजनिक होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई अक्सर किसी बड़ी घटना के बाद ही दिखती है। नियमित जांच और सख्ती न होने से ऐसे क्लीनिक बेखौफ काम करते रहते हैं। विशुन की मौत के बाद इलाके में डर और नाराजगी दोनों है। परिवार न्याय की मांग कर रहा है, जबकि गांव के लोग चाहते हैं कि इस मामले को उदाहरण बनाकर अवैध क्लीनिकों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आगे किसी और घर का चिराग इस तरह न बुझे।