दहेज उत्पीड़न के बाद मौत का आरोप : न्याय के लिए एसपी से मिले परिजन
Mon, Jun 29, 2026
पति और सास पर ढाई लाख रुपये व बाइक मांगने का आरोप, परिजनों ने हत्या का लगाया आरोप
उन्नाव। बिहार थाना क्षेत्र में विवाहिता की संदिग्ध मौत के मामले में दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज होने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर पीड़ित परिवार ने सोमवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। परिजनों ने पति और सास की जल्द गिरफ्तारी तथा निष्पक्ष जांच की मांग की है। रायबरेली के गुरुबक्शगंज थाना क्षेत्र के सतांव निवासी बृजमोहन सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनकी पुत्री स्वाती सिंह उर्फ लक्ष्मी की शादी एक मई 2021 को बिहार थाना क्षेत्र के नमाखेड़ा मजरा जमीपुर निवासी मयंक विक्रम सिंह उर्फ गोलू के साथ हुई थी। आरोप है कि शादी के बाद से ही पति और सास मुन्नी सिंह अतिरिक्त दहेज में ढाई लाख रुपये और एक मोटरसाइकिल की मांग करने लगे। पीड़ित परिवार का कहना है कि मांग पूरी न होने पर स्वाती को लगातार प्रताड़ित किया जाता था। कई बार दोनों पक्षों में समझौता भी हुआ और स्वाती को ससुराल भेजा गया, लेकिन हालात नहीं बदले। परिजनों के मुताबिक 14 अप्रैल 2026 को सूचना मिली कि स्वाती ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। सूचना पर पहुंचे परिजनों ने शव कमरे के फर्श पर पड़ा देखा। उनके अनुसार गले पर चोट के निशान भी थे। पिता ने आरोप लगाया कि दहेज की मांग पूरी न होने पर पति और सास ने मिलकर स्वाती की हत्या कर दी और उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की। पुलिस ने तहरीर के आधार पर पति और सास के खिलाफ दहेज हत्या समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सोमवार को पीड़ित परिवार ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश सिंह से मुलाकात कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। परिजनों का कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भी आरोपी अब तक फरार हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बारात से पहले घर पहुंची मौत की खबर : किशोरी की सड़क हादसे में जान गई
Mon, Jun 29, 2026
खरीदारी को निकली थी सुमन, तेज रफ्तार डंपर ने मारी टक्कर
उन्नाव। पुरवा कोतवाली क्षेत्र में सोमवार दोपहर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में शादी की खरीदारी के लिए निकली एक किशोरी की मौत हो गई, जबकि उसकी मौसी गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसे में महिला का एक पैर कटकर अलग हो गया। घटना के कुछ ही घंटे बाद घर में बारात आने वाली थी, लेकिन हादसे ने शादी की खुशियों को मातम में बदल दिया। जानकारी के अनुसार, भदनांग गांव निवासी रामबाबू की 16 वर्षीय बेटी सुमन अपनी मौसी दुर्गा के साथ बाइक से खरीदारी करने निकली थी। परिवार में अमरापुर गांव में रहने वाली सुमन की छोटी मौसी सरस्वती की शादी थी और घर में बारात के स्वागत की तैयारियां जोरों पर चल रही थीं। बताया जा रहा है कि दोपहर करीब एक बजे खिन्नी मोड़ के पास तेज रफ्तार डंपर ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों सड़क पर दूर जा गिरीं। हादसे में सुमन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दुर्गा गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसे में उनका एक पैर कटकर अलग हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल महिला को इलाज के लिए अस्पताल भिजवाया। वहीं किशोरी के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। मृतका के मौसा बबलू ने बताया कि घर में शादी का माहौल था और कुछ ही देर बाद बारात आने वाली थी। सुमन अपनी मौसी के साथ शादी के लिए कपड़े खरीदने गई थी। हादसे की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।सुमन चार भाई-बहनों में थी। उसकी मौत से मां गुड्डी, पिता रामबाबू, बहन अंशिका और भाइयों का रो-रोकर बुरा हाल है। एक तरफ घर में शादी की रस्में चल रही थीं, वहीं दूसरी तरफ किशोरी की मौत से पूरा परिवार गम में डूब गया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। डंपर और चालक की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। घायल महिला का अस्पताल में इलाज जारी है।
शुक्लागंज में पुल निर्माण के लिए चला बुलडोजर : चार और मकान ढहे; मुआवजे को लेकर उठे सवाल
Mon, Jun 29, 2026
17 मकान ध्वस्त, 21 पर अभी बाकी कार्रवाई, प्रभावित परिवारों ने प्रशासन पर लगाया अनदेखी का आरोप
उन्नाव। शुक्लागंज की मिश्रा कॉलोनी में नए पुल निर्माण के लिए मकानों को हटाने का अभियान सोमवार को भी जारी रहा। प्रशासन ने पोकलैंड मशीनों की मदद से चार और मकानों को ध्वस्त कर दिया। अब तक कुल 17 मकान गिराए जा चुके हैं, जबकि करीब 21 मकानों पर अभी कार्रवाई बाकी है। इस बीच प्रभावित परिवारों ने मुआवजा न मिलने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई है। सोमवार सुबह करीब नौ बजे राजस्व विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण अभियान दोबारा शुरू किया गया। पुल निर्माण की जद में आने वाले मकानों को पहले ही खाली कराया जा चुका था। मोहर्रम के चलते शुक्रवार को अभियान रोक दिया गया था, जिसे शनिवार से फिर शुरू किया गया। हालांकि पोकलैंड मशीनों से कार्रवाई की जा रही है, लेकिन ध्वस्तीकरण की रफ्तार धीमी बनी हुई है। इससे पुल निर्माण से जुड़ी अन्य परियोजनाओं की गति भी प्रभावित हो रही है। लगातार चल रही कार्रवाई के बीच मिश्रा कॉलोनी का बड़ा हिस्सा अब मलबे में तब्दील हो चुका है। इधर, कई प्रभावित परिवारों ने प्रशासन पर मुआवजे में भेदभाव का आरोप लगाया है। स्थानीय निवासी सरस्वती ने बताया कि कुछ लोगों को मुआवजा मिल चुका है, लेकिन उनका परिवार समेत कई अन्य लोग अब भी भुगतान से वंचित हैं। उनका कहना है कि मकान की दीवारों और निर्माण सामग्री तक की लागत नहीं दी गई है। सरस्वती ने बताया कि करीब एक माह पहले उनके पति का निधन हो गया था और अब पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं पर है। मुआवजे के लिए कई बार आवेदन देने के बावजूद अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उनके पास मकान से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं, हालांकि टैक्स से संबंधित अभिलेख नहीं हैं। अन्य प्रभावितों ने भी यही आरोप दोहराए। उनका कहना है कि विधायक, जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी कार्यालय में कई बार प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन अब तक कोई राहत नहीं मिली। लोगों का कहना है कि वर्षों की मेहनत और कर्ज लेकर बनाए गए मकानों के टूटने के बाद अब उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। कुछ प्रभावितों ने मांग की है कि भले ही जमीन का मुआवजा न मिले, लेकिन मकान निर्माण में लगी लागत का भुगतान जरूर किया जाए। एक दिव्यांग पीड़ित ने बताया कि शारीरिक स्थिति के कारण सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना उनके लिए बेहद मुश्किल है। ऐसे में प्रशासन से जल्द न्याय की उम्मीद है।