रिकॉर्ड में मृत दिखाए गए दो बुजुर्ग : एक साल से पेंशन के लिए भटक रहे
Mon, Feb 23, 2026
आधार कार्ड दिखाने के बाद भी नहीं सुधरी त्रुटि, ब्लॉक-तहसील के चक्कर काटने को मजबूर
उन्नाव। बिछिया ब्लॉक क्षेत्र के मुर्तजानगर गांव में प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है। गांव के छोटे लाल पुत्र सूरज बली और गंगा चरण पुत्र मिश्री लाल को सरकारी अभिलेखों में मृत दर्शा दिया गया है, जबकि दोनों जीवित हैं। रिकॉर्ड में मृत दिखाए जाने के कारण उनकी वृद्धावस्था पेंशन पिछले करीब एक वर्ष से बंद है। पेंशन बहाली के लिए दोनों बुजुर्ग लगातार ब्लॉक और तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। छोटे लाल और गंगा चरण ने बताया कि उन्हें नियमित रूप से वृद्धावस्था पेंशन मिल रही थी। यही उनकी आजीविका का मुख्य साधन था। कुछ महीने पहले अचानक उनके खाते में पेंशन आनी बंद हो गई। जानकारी करने पर पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। यह सुनकर वे और उनके परिजन हैरान रह गए। दोनों बुजुर्गों का कहना है कि वे कई बार संबंधित अधिकारियों के सामने उपस्थित होकर आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्र दिखा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद रिकॉर्ड में सुधार नहीं किया गया। पेंशन बंद होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। दवा, राशन और अन्य जरूरी खर्च पूरे करना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों ने भी इस मामले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि जीवित लोगों को कागजों में मृत दिखा दिया जाए और सुधार में महीनों लग जाएं, तो योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने मामले की जांच कर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई और दोनों बुजुर्गों की पेंशन तत्काल बहाल करने की मांग की है। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि मामला संज्ञान में है। अभिलेखों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
गंगाघाट नगर पालिका को हरी झंडी : 8.5 करोड़ से बनेगा नया दफ्तर
Mon, Feb 23, 2026
20 हजार वर्गफुट में तैयार होगा अत्याधुनिक भवन, डिजिटल सिस्टम से होगी रिकॉर्ड व्यवस्था
उन्नाव।
गंगाघाट नगर पालिका परिषद को अपना नया और आधुनिक कार्यालय भवन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। लंबे समय से लंबित प्रस्ताव को शासन ने मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री वैश्विक नगर योजना के तहत इस परियोजना के लिए 8.5 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। करीब 20 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बनने वाला यह दो मंजिला भवन गंगाघाट के प्रशासनिक ढांचे को नई दिशा देगा। फिलहाल पालिका कार्यालय पंप हाउस परिसर से संचालित हो रहा है, जहां जगह की कमी के कारण कर्मचारियों और आम लोगों दोनों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। सीमित कमरों और अव्यवस्थित रिकॉर्ड के चलते कामकाज प्रभावित हो रहा था। स्थिति को देखते हुए पालिकाध्यक्ष कौमुदी पांडे और अधिशासी अधिकारी ने नए भवन का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इसके बाद नगर निकाय निदेशालय, लखनऊ की प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट की टीम ने स्थल निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। हाल में सर्वे की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। अब औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश जल निगम की इकाई सीएनडीएस को सौंपी गई है।कार्यदायी संस्था ने मृदा परीक्षण, ड्रॉइंग और विस्तृत सर्वे जैसे शुरुआती काम तेज कर दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही निर्माण कार्य जमीन पर नजर आने लगेगा।प्रस्तावित भवन में सभी विभागों के लिए अलग-अलग कक्ष बनाए जाएंगे, जिससे कामकाज व्यवस्थित ढंग से हो सके। रिकॉर्ड प्रबंधन को पूरी तरह डिजिटल करने की योजना है। कंप्यूटरीकृत सिस्टम और ई-लाइब्रेरी की व्यवस्था की जाएगी, ताकि दस्तावेज सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध रहें। इससे नागरिकों को प्रमाण पत्र, कर संबंधित जानकारी और अन्य सेवाएं कम समय में मिल सकेंगी। दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए रैंप, विशेष शौचालय और सुगम आवागमन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही पर्याप्त पार्किंग और प्रतीक्षालय की व्यवस्था प्रस्तावित है। पालिकाध्यक्ष कौमुदी पांडे ने कहा कि लंबे समय से गंगाघाट क्षेत्र के लोगों को एक व्यवस्थित कार्यालय की जरूरत थी। नए भवन से न केवल कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा, बल्कि आम नागरिकों को भी पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य गुणवत्ता और तय समयसीमा में पूरा कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।पालिका प्रशासन का मानना है कि यह भवन गंगाघाट के शहरी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वर्षों से सीमित संसाधनों के बीच काम कर रही परिषद अब आधुनिक ढांचे की ओर कदम बढ़ा रही है, जिसका सीधा लाभ क्षेत्र की जनता को मिलेगा।
15 दिन बाद खेत में मिली बुजुर्ग की लाश : शराब पार्टी के बहाने ले जाने का आरोप
Sun, Feb 22, 2026
7 फरवरी से लापता थे शिवपाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
उन्नाव। पुरवा कोतवाली क्षेत्र में एक बुजुर्ग की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। करीब पंद्रह दिन से लापता 65 वर्षीय शिवपाल रावत का शव रविवार शाम अरहर के खेत में सड़ी-गली हालत में मिला। शुरुआती परिस्थितियां महज गुमशुदगी की कहानी नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश की ओर इशारा कर रही हैं।
खेत में अलग रहते थे शिवपाल
शिवपाल रावत मूल रूप से भूपतिपुर गांव के रहने वाले थे। परिवार के मुताबिक वह गांव के बाहर अपने खेत में बनी झोपड़ी में अकेले रहते थे। उनकी बहू रेनू गांव के मकान में देवरानी और बच्चों के साथ रहती है। बड़ा बेटा राजकुमार सऊदी अरब में काम करता है, जबकि छोटा बेटा बबलू राजस्थान के गंगानगर में मजदूरी करता है। रेनू के अनुसार, 7 फरवरी को शिवपाल उनसे मिलने गांव आए थे। इसके बाद वह वापस खेत की ओर लौट गए। उसी शाम गांव के एक व्यक्ति रामबाबू ने बताया कि शिवपाल कई दिनों से खेत पर नजर नहीं आए हैं। परिवार ने खोजबीन शुरू की और 20 फरवरी को गुमशुदगी की तहरीर पुलिस को दी गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर तलाश शुरू की थी।
बदबू ने खोला राज
रविवार शाम खोजबीन के दौरान शिवपाल की बेटी सुनीता और दामाद नीलेश पुरवा-मझिगवां मार्ग पर असेहरु गांव के पास पहुंचे। कस्बा निवासी गुड्डू के अरहर के खेत से तेज बदबू आ रही थी। शक होने पर जब वे खेत के अंदर गए तो वहां शिवपाल का शव औंधे मुंह पड़ा मिला। शव बुरी तरह सड़ चुका था। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी अमरनाथ यादव मौके पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम को बुलाकर साक्ष्य जुटाए गए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
शराब पिलाने के बहाने ले जाने का आरोप
बेटी सुनीता का आरोप है कि गांव के ही रामबाबू 7 फरवरी को उनके पिता को अपने साथ ले गया था। उन्हें पुरवा कस्बे के पास जंगलीपीर बाबा स्थल के निकट लखन नाम के व्यक्ति के घर शराब पीने के लिए ले जाया गया। सुनीता का कहना है कि उनके पिता ने कुछ समय पहले लखन की चारपाई बनाई थी और उसी जान-पहचान के आधार पर बुलाया गया था। परिवार को शक है कि वहीं हत्या कर शव को खेत में फेंक दिया गया। हालांकि पुलिस अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। थाना प्रभारी अमरनाथ यादव ने बताया कि गुमशुदगी पहले से दर्ज थी। अब बेटे बबलू की तहरीर के आधार पर गांव के दो लोगों के खिलाफ हत्या की आशंका में केस दर्ज किया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारण साफ होंगे और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कई सवाल खड़े
इस घटना ने स्थानीय पुलिस की गश्त और निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव के बाहर खेत में शव पड़े रहने के बावजूद कई दिनों तक किसी को भनक न लगना चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों में दहशत और आक्रोश दोनों हैं। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। विदेश और दूसरे राज्यों में काम कर रहे बेटों को सूचना दे दी गई है। फिलहाल सबकी नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच पर टिकी है, जो तय करेगी कि यह मौत हादसा थी, या दोस्ती की आड़ में रची गई साजिश।