रंगमंच से जुड़ीं कहानियां : उन्नाव में दिखा अनोखा सांस्कृतिक संगम
Sat, Apr 4, 2026
कलाकारों की प्रस्तुति पर गूंजी तालियां, दर्शकों ने किया स्वागत
उन्नाव। हिंदी रंगमंच दिवस के मौके पर शहर में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम ने दर्शकों को एक नया अनुभव दिया। किंग्सन इंटर कॉलेज, दरोगा बाग में शुक्रवार को उदय सांस्कृतिक संस्थान के तत्वावधान में साहित्यकार नसीर अहमद ‘नसीर’ की कहानियों का नाट्य रूपांतरण कर मंचन किया गया। जनपद में पहली बार कहानियों को अलग-अलग नाट्य शैलियों में प्रस्तुत करने का प्रयोग किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम का निर्देशन रंगकर्मी जब्बार अकरम ने किया। उनके निर्देशन में रहमान रूमी, जया उपाध्याय, शफी अहमद खान, रफीक अहमद, राघवेंद्र सिंह और एस.के. टाइगर ने प्रभावशाली अभिनय के जरिए कहानियों को जीवंत कर दिया। मंचन के दौरान संवाद और भाव-भंगिमा ने दर्शकों को अंत तक जोड़े रखा। मुख्य अतिथि सदर विधायक पंकज गुप्ता ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि रंगमंच समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने का सशक्त माध्यम है और ऐसे आयोजन सामाजिक एकता को मजबूती देते हैं।
कार्यक्रम के आयोजक और भारतीय धर्म संसद के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र वर्मा ‘बाबा’ ने कहा कि उन्नाव की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए इस तरह के प्रयोग जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि साहित्य और रंगमंच को जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी जड़ों और रचनात्मक परंपराओं से जुड़ सकें। वहीं निर्देशक जब्बार अकरम ने बताया कि कहानियों को मंच पर लाना एक चुनौतीपूर्ण लेकिन रोचक अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि जनपद में इस तरह का प्रयोग पहली बार किया गया है। हमारी कोशिश रही कि कहानी की आत्मा को बनाए रखते हुए उसे रंगमंच की भाषा में ढाला जाए, ताकि दर्शक उससे सीधे जुड़ सकें।
कार्यक्रम का संचालन बछरावां डिग्री कॉलेज, रायबरेली के पूर्व प्राचार्य डॉ. रामनरेश ने किया। अंत में किंग्सन इंटर कॉलेज के प्रबंधक अहमद मोनिस रिजवी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान डॉक्टर प्रेमचंद सिंह, अस्मिता उपाध्याय, दिव्यांशी अवस्थी, अखिलेश तिवारी, शकील खान, संजय कुमार जायसवाल, आसिम जाफरी, विकेश बाजपेई, आजम अकरम, अभिषेक वर्मा, राघवेंद्र कुमार पाल, दिनेश प्रियमन, अनिल पांडे, मनीष सिंह सेंगर, प्रभात सिन्हा, आरिफ, रघुराज मगन, इंद्रसेन सिंह, फैज अहमद अल्वी और शादाब हाशमी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
केरल विधानसभा चुनाव : उन्नाव के मोहम्मद अहमद ने यूडीएफ प्रत्याशी के लिए मांगे वोट
Sat, Apr 4, 2026
गांव-गांव पहुंचकर मतदाताओं से की अपील, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मतीन खां भी रहे साथ
उन्नाव/केरल। केरल की कंडोट्टी विधानसभा सीट पर चुनाव प्रचार के बीच उन्नाव के नेता मोहम्मद अहमद की सक्रिय भूमिका चर्चा में है। प्रदेश उपाध्यक्ष के तौर पर उन्होंने वहां पहुंचकर यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के उम्मीदवार टीपी अशरफ अली के समर्थन में जोरदार जनसंपर्क अभियान चलाया। उन्होंने क्षेत्र में जनसंपर्क कर मतदाताओं से प्रत्याशी के पक्ष में मतदान की अपील की। उन्नाव से जुड़े नेता मोहम्मद अहमद की इस सक्रियता को स्थानीय स्तर पर भी अहम माना जा रहा है। इससे साफ है कि कंडोट्टी का चुनाव अब सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक दिलचस्पी का केंद्र बनता जा रहा है।
मोहम्मद अहमद ने कंडोट्टी विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों के गांव-गांव और मोहल्लों में पहुंचकर लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने विकास, रोजगार और स्थानीय समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बताते हुए यूडीएफ को समर्थन देने की बात कही। उनके साथ प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मतीन खां भी मौजूद रहे, जिन्होंने जनसभाओं में लोगों को संबोधित किया।प्रचार के दौरान नुक्कड़ सभाएं और जनसंपर्क अभियान चलाए गए। नेताओं ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए मजबूत नेतृत्व जरूरी है। उन्होंने टीपी अशरफ अली को अनुभवी बताते हुए उनके पक्ष में मतदान करने की अपील की। मोहम्मद अहमद की सक्रियता से स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला। उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया। कंडोट्टी सीट पर चुनाव को लेकर सभी दलों ने ताकत झोंक दी है, जिससे मुकाबला रोचक हो गया है।
खाड़ी तनाव का असर : उन्नाव के चमड़ा उद्योग पर निर्यात आधा और लागत दोगुनी
Sat, Apr 4, 2026
केमिकल महंगे, कालाबाजारी तेज; असद इराकी बोले—सरकारी राहत से कुछ सहारा, पर संकट बरकरार
उन्नाव। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब उन्नाव के चमड़ा उद्योग पर गहराता दिख रहा है। खाड़ी क्षेत्र में हालात बिगड़ने से समुद्री परिवहन प्रभावित हुआ है, जिससे आयात-निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ गई है। उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक, निर्यात करीब 50 फीसदी तक गिर चुका है और हालात जल्द सुधरते नजर नहीं आ रहे। चर्म निर्यात परिषद के पूर्व अध्यक्ष असद कमाल इराकी ने बताया कि सबसे ज्यादा असर दो मोर्चों पर पड़ा है—ढुलाई और कच्चे माल की कीमत। उनका कहना है कि यूरोपीय देशों में माल भेजना अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा महंगा हो गया है, क्योंकि शिपमेंट के पारंपरिक रूट प्रभावित हैं। जहां पहले एक कंटेनर भेजने में करीब 1100 से 1200 डॉलर खर्च आता था, वहीं अब यह लागत बढ़कर 3000 से 3500 डॉलर तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि परिवहन खर्च बढ़ने का सीधा असर निर्यात पर पड़ा है। कई छोटे और मध्यम निर्यातक ऑर्डर पूरे करने में हिचक रहे हैं, जबकि विदेशी खरीदार भी बढ़ी लागत के कारण ऑर्डर कम कर रहे हैं। असद इराकी के मुताबिक, कच्चे माल की कीमतों में उछाल ने स्थिति और गंभीर बना दी है। चमड़े की टैनिंग में इस्तेमाल होने वाला फार्मिक एसिड 60 रुपये से बढ़कर 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि सोडियम फार्मेट 37 रुपये से बढ़कर 60 रुपये किलो हो गया है। इसके अलावा अमोनियम नाइट्रेट, मेथनॉल, पीवीसी, स्टाइरीन, एसेटिक एसिड और फॉर्मेल्डिहाइड जैसे अन्य केमिकल भी महंगे हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बाजार में इन केमिकल्स की कालाबाजारी भी बढ़ रही है। सीमित सप्लाई का फायदा उठाकर कीमतें मनमाने तरीके से बढ़ाई जा रही हैं, जिससे उत्पादन लागत पर सीधा दबाव पड़ रहा है। हालांकि, उन्होंने केंद्र सरकार के हालिया फैसले को आंशिक राहत देने वाला बताया। पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर 8.25 फीसदी आयात शुल्क तीन महीने के लिए खत्म किए जाने से लागत में कुछ कमी आने की उम्मीद है। लेकिन उनका कहना है कि जब तक सप्लाई चेन और परिवहन की समस्या दूर नहीं होती, तब तक उद्योग को पूरी राहत मिलना मुश्किल है। असद इराकी ने मांग की कि सरकार बाजार पर सख्त निगरानी रखे, कालाबाजारी पर रोक लगाए और निर्यातकों को स्थिर माहौल देने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि चमड़ा उद्योग दोबारा पटरी पर लौट सके।