क्रिकेट मैच के दौरान मधुमक्खियों का हमला : अंपायर की मौत, 15 से ज्यादा खिलाड़ी घायल
Thu, Feb 19, 2026
मैदान के आसपास छत्ते की आशंका, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल-प्रशासन ने शुरू की जांच
उन्नाव। एक स्थानीय क्रिकेट मैच उस वक्त मातम में बदल गया, जब मैदान पर अचानक मधुमक्खियों का झुंड टूट पड़ा। शुक्लागंज क्षेत्र के सप्रू मैदान में बुधवार शाम खेले जा रहे मुकाबले के दौरान हुए इस हमले में 65 वर्षीय अंपायर मणिक गुप्ता की मौत हो गई, जबकि 15 से 20 खिलाड़ी और एक अन्य अंपायर घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मैच अपने सामान्य ढंग से चल रहा था। खिलाड़ी फील्डिंग में व्यस्त थे और दर्शक किनारे से मुकाबला देख रहे थे। तभी अचानक आसमान की ओर से भिनभिनाहट तेज हुई और कुछ ही सेकंड में मधुमक्खियों का बड़ा झुंड मैदान पर मौजूद लोगों पर टूट पड़ा। पहले तो किसी को समझ नहीं आया कि हो क्या रहा है, लेकिन डंक लगने के बाद अफरातफरी मच गई। खिलाड़ी बल्ला और ग्लव्स छोड़कर इधर-उधर भागने लगे। कई लोग जमीन पर लेट गए तो कुछ पास की इमारतों की ओर दौड़े।
गंभीर हालत में गिरे अंपायर
कानपुर निवासी मणिक गुप्ता उस मैच में अंपायरिंग कर रहे थे। चश्मदीदों का कहना है कि उन पर मधुमक्खियों ने एक साथ हमला कर दिया। चेहरे और सिर पर लगातार डंक लगने से वह कुछ ही देर में लड़खड़ा गए और बेहोश होकर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने कपड़ों और तौलियों से मधुमक्खियों को हटाने की कोशिश की, लेकिन झुंड काफी देर तक मंडराता रहा। उन्हें तुरंत शुक्लागंज के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत नाजुक देखते हुए डॉक्टरों ने कानपुर के रेफर कर दिया। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, शरीर पर बड़ी संख्या में डंक लगने से गंभीर एलर्जिक रिएक्शन और शॉक की स्थिति बन सकती है, जो जानलेवा साबित होती है।
अन्य खिलाड़ी भी चपेट में
पुलिस के अनुसार, एक अन्य अंपायर और करीब 15 से 20 खिलाड़ियों को भी मधुमक्खियों ने डंक मारे। अधिकतर को हल्की से मध्यम चोटें आईं। कुछ का स्थानीय अस्पताल में इलाज कराया गया, जबकि कुछ ने प्राथमिक उपचार के बाद घर लौटना बेहतर समझा। फिलहाल सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है।
क्रिकेट संघ ने जताया शोक
कानपुर क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष एस. एन. सिंह ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हादसा है। उन्होंने बताया कि जब मणिक गुप्ता को अस्पताल ले जाया जा रहा था, तब भी उनके चेहरे और शरीर से मधुमक्खियां चिपकी हुई थीं। इससे हमले की तीव्रता का अंदाजा लगाया जा सकता है। संघ ने शोक संतप्त परिवार को हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया है।
सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि मैदान या उसके आसपास कहीं मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता रहा होगा, जो किसी वजह से भड़क गया। यह भी देखा जा रहा है कि क्या मैच से पहले मैदान की समुचित जांच की गई थी या नहीं। इस हादसे ने छोटे और स्थानीय खेल आयोजनों में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर ऐसे मैचों में एंबुलेंस, मेडिकल टीम या आपातकालीन प्रबंधन की स्पष्ट व्यवस्था नहीं होती। विशेषज्ञों का मानना है कि खुले मैदानों में कार्यक्रम से पहले आसपास के पेड़ों और इमारतों की जांच जरूरी है, खासकर गर्मी या बसंत के मौसम में जब मधुमक्खियां ज्यादा सक्रिय रहती हैं।
परिवार और खेल जगत में शोक
मणिक गुप्ता लंबे समय से स्थानीय स्तर पर अंपायरिंग से जुड़े थे और क्रिकेट जगत में उनकी पहचान एक अनुभवी और शांत स्वभाव के अधिकारी के रूप में थी। उनके निधन की खबर मिलते ही खेल प्रेमियों और साथियों में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर भी खिलाड़ियों और क्रिकेट संगठनों ने श्रद्धांजलि दी। पुलिस ने बताया कि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सटीक कारण की पुष्टि होगी। वहीं प्रशासन ने मैदान के आसपास संभावित छत्तों की पहचान और उन्हें सुरक्षित तरीके से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एक खेल मुकाबला, जो उत्साह और प्रतिस्पर्धा का प्रतीक होता है, वह कुछ ही मिनटों में त्रासदी में बदल गया। यह घटना याद दिलाती है कि सुरक्षा इंतजाम सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि हर आयोजन की बुनियादी जरूरत हैं।
उन्नाव में संबद्धीकरण पर सख्ती : 10 लिपिक वापस भेजे गए मूल तैनाती स्थल पर
Thu, Feb 19, 2026
स्थानांतरण नीति की अनदेखी उजागर होने के बाद शासन का एक्शन, दोषियों पर आरोप पत्र के निर्देश
उन्नाव। जिला विकास विभाग में लंबे समय से चल रहे संबद्धीकरण के खेल पर आखिरकार शासन ने ब्रेक लगा दिया है। जिला मुख्यालय पर नियमों के विपरीत तैनात किए गए वरिष्ठ सहायक, प्रधान सहायक और अन्य लिपिकीय कर्मचारियों को उनके मूल विकास खंडों में वापस भेज दिया गया है। यह कार्रवाई वार्षिक स्थानांतरण नीति की अनदेखी और शिकायतों की पुष्टि के बाद की गई है। जानकारी के अनुसार, जिला विकास अधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में तैनाती को लेकर कई महीनों से शिकायतें शासन तक पहुंच रही थीं। आरोप था कि कुछ कर्मचारियों को नियमों के खिलाफ जिला मुख्यालय से संबद्ध कर रखा गया, जबकि कागजों में उनकी तैनाती विकास खंडों में दर्शाई जा रही थी।
तीन साल में पटल परिवर्तन का नियम ठंडे बस्ते में
स्थानांतरण नीति के तहत हर तीन वर्ष में पटल प्रभारी बदलना अनिवार्य है, ताकि एक ही कर्मचारी लंबे समय तक एक ही संवेदनशील कार्य से न जुड़ा रहे। लेकिन उन्नाव में इस नियम का पालन नहीं किया गया। कुछ कर्मचारियों को उनकी सुविधा के अनुसार विभाग और पटल से जोड़े रखा गया। इसी क्रम में पंचायत सचिव संवर्ग के कई कर्मचारियों को भी जिला मुख्यालय से संबद्ध रखा गया था। इनमें अभिषेक तिवारी, सुनील कुमार, देवेंद्र सिंह, मयूरी, पुत्तन लाल पाल और राम सागर यादव शामिल हैं।
आयुक्त के आदेश के बाद तेज हुई कार्रवाई
30 जनवरी को ग्राम्य विकास आयुक्त ने जिलाधिकारी गौरांग राठी को निर्देश दिया कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया जाए। इसके बाद जिला विकास अधिकारी देव कुमार चतुर्वेदी ने 12 फरवरी को आदेश जारी कर दस कर्मचारियों को उनकी मूल तैनाती पर वापस भेज दिया।जिन कर्मचारियों को वापस भेजा गया है उनमें अनुराग सिंह और हुकम सिंह (प्रधान सहायक), शिवकुमार, दीपक सिंह, आरती वर्मा, हीरा सिंह, सुनील कुमार शुक्ला (वरिष्ठ सहायक), अर्पित कुशवाहा और प्रतिभा (कनिष्ठ सहायक) शामिल हैं। इसके अलावा उर्दू अनुवादक संवर्ग से शब्बीर अंसारी, बिलाल अख्तर, अंजुमन आरा और इकबाल अहमद को भी मूल पदस्थापना स्थल पर भेजा गया है।
सिस्टम पर उठे सवाल
सूत्रों का कहना है कि विकास विभाग में लंबे समय से “संबद्धीकरण” को एक व्यवस्था की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। इससे न सिर्फ नीति की मंशा प्रभावित हुई, बल्कि विकास खंडों में कार्यप्रणाली भी प्रभावित हुई। कई ब्लॉकों में कर्मचारियों की कमी बनी रही, जबकि वे जिला मुख्यालय में काम कर रहे थे। अब शासन की सख्ती के बाद विभाग में हलचल है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अन्य विभागों में भी संबद्धीकरण की समीक्षा हो सकती है।
जांच के बाद सख्त कदम संभव
अभी आरोप पत्र की प्रक्रिया बाकी है। यदि जांच में अनियमितता साबित होती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई भी संभव है। फिलहाल इस कदम को प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में अहम माना जा रहा है। उन्नाव में यह कार्रवाई साफ संकेत है कि स्थानांतरण नीति को अब हल्के में लेने की गुंजाइश नहीं रहेगी।
12 घंटे थमा ट्रैफिक : चार बजे शुरू हुआ जाम, शाम चार बजे मिली राहत
Wed, Feb 18, 2026
सोनिक और बदरका के बीच 9 किमी लंबा जाम, एम्बुलेंस और स्कूल बसें भी रेंगती रहीं
उन्नाव। कानपुर-लखनऊ हाईवे पर बुधवार का दिन सफर कर रहे लोगों के लिए बेहद कठिन रहा। सुबह तड़के शुरू हुई परेशानी शाम तक पीछा नहीं छोड़ सकी। सोनिक और बदरका के पास दो अलग-अलग सड़क हादसों ने यातायात को पूरी तरह चरमराकर रख दिया। हालात ऐसे बने कि करीब नौ किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई और अनुमानित छह हजार गाड़ियां घंटों जाम में फंसी रहीं।
भोर में पहला हादसा, जाम की शुरुआत
सुबह करीब चार बजे दही थाना क्षेत्र में मिर्जा फैक्ट्री के पास एक डंपर पहले से खराब हालत में खड़ा था। इसी दौरान हमीरपुर की ओर से आ रहा दूसरा डंपर पीछे से उसमें जा भिड़ा। टक्कर काफी तेज थी। चालक देवी शंकर, निवासी घाटमपुर, गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया। उस समय हाईवे पर पैचिंग और मरम्मत का काम चल रहा था। सड़क पहले से संकरी थी। हादसे के बाद एक लेन पूरी तरह बाधित हो गई। देखते ही देखते लंबी कतार लग गई। ओवरलोड डंपर को हटाने में काफी समय लगा। बताया गया कि हाइड्रोलिक क्रेन भी तुरंत काम नहीं कर सकी, इसलिए पहले वाहन खाली कराया गया, फिर किनारे किया गया। इसी प्रक्रिया में कई घंटे निकल गए।
बदरका में दूसरी टक्कर, हालात और बिगड़े
सोनिक में राहत कार्य जारी ही था कि सुबह करीब सात बजे अचलगंज थाना क्षेत्र के बदरका चौराहे पर दूसरा हादसा हो गया। यहां एक ट्रक खराब होकर सड़क पर ही खड़ा था। चालक वाहन छोड़कर चला गया था। पीछे से आ रहे ट्राला ने उसमें टक्कर मार दी। इसके बाद अचलगंज से दही चौकी तक ट्रैफिक पूरी तरह थम गया। दोनों ओर से आने-जाने वाले वाहन फंस गए। कई लोग हाईवे छोड़कर सर्विस लेन की ओर मुड़े, लेकिन थोड़ी देर में वहां भी लंबी लाइन लग गई। स्थिति ऐसी रही कि गाड़ियां इंच-इंच खिसकती रहीं।
एम्बुलेंस, ऑफिस जाने वाले और बच्चे परेशान
जाम का असर आम लोगों पर साफ दिखा। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी समय पर नहीं पहुंच सके। स्कूली बसों में बैठे बच्चे घंटों फंसे रहे। कुछ एम्बुलेंस भी रास्ते में अटकी रहीं, जिससे मरीजों के परिजन चिंतित नजर आए। परेशान लोग डायल 112 पर फोन करते रहे और सोशल मीडिया के जरिए भी मदद की अपील की।
करोड़ों खर्च, मगर ट्रैफिक मैनेजमेंट कमजोर
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे सुधार के नाम पर करीब 98 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, फिर भी सोनिक से जाजमऊ के बीच जाम की समस्या बार-बार सामने आती है। सड़क पर खराब खड़े वाहनों को समय पर नहीं हटाया जाता। निर्माण और मरम्मत कार्य के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन की स्पष्ट व्यवस्था नहीं होती। यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि हाईवे जैसे व्यस्त मार्ग पर इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम मजबूत होना चाहिए। क्रेन और रिकवरी वाहन रणनीतिक जगहों पर तैनात रहें तो ऐसे जाम की अवधि कम की जा सकती है।
शाम के बाद मिली राहत
पुलिस और प्रशासन की टीमों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला। क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर और ट्रैफिक को धीरे-धीरे डायवर्ट करके शाम करीब चार बजे के बाद हालात सामान्य होने लगे। हालांकि तब तक हजारों लोग घंटों की देरी झेल चुके थे।
शुक्लागंज में डेढ़ घंटे का अलग जाम
इधर गंगाघाट थाना क्षेत्र के शुक्लागंज में भी सुबह करीब 10 बजे से 11:30 बजे तक भीषण जाम लगा रहा। कानपुर और उन्नाव के बीच रोजाना आवागमन करने वाले सैकड़ों वाहन करीब डेढ़ घंटे तक फंसे रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुक्लागंज मुख्य चौराहे और आसपास की संकरी सड़कों पर पहले से ट्रैफिक का दबाव था। स्कूल और दफ्तर का समय होने के कारण भीड़ ज्यादा थी। इसी बीच कुछ बड़े वाहन आमने-सामने आ गए और रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। देखते ही देखते दोनों ओर लंबी कतार लग गई।
बुधवार की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि हाईवे पर सिर्फ सड़क चौड़ी होना काफी नहीं है। समय पर कार्रवाई, सख्त निगरानी और बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन ही ऐसे हालात से राहत दिला सकते हैं।