अवैध शराब पर आबकारी का शिकंजा : 63 लीटर कच्ची शराब बरामद
Fri, Jan 23, 2026
महुआ लहन नष्ट, एक महिला गिरफ्तार, दो मुकदमे दर्ज
उन्नाव। मौरावां थाना क्षेत्र में अवैध कच्ची शराब के कारोबार पर आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। छापेमारी के दौरान 63 लीटर कच्ची शराब बरामद की गई, जबकि मौके पर तैयार किया जा रहा करीब 300 किलो महुआ लहन नष्ट कर दिया गया। इस कार्रवाई में एक महिला को गिरफ्तार किया गया है, जिसके खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई आबकारी आयुक्त उत्तर प्रदेश, जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और संयुक्त आबकारी आयुक्त लखनऊ जोन के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत की गई। अभियान का मकसद जिले में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाना है।
जिला आबकारी अधिकारी अनुराग मिश्र के नेतृत्व में आबकारी निरीक्षक निशांत सिंह और मौरावां थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को ग्राम लोटना और लालखेड़ा में दबिश दी। टीम को पहले से सूचना मिली थी कि इन गांवों में कच्ची शराब बनाई जा रही है। सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में बड़ी मात्रा में शराब और लहन बरामद हुआ।आबकारी अधिकारियों के मुताबिक, मौके पर मिला महुआ लहन शराब बनाने की प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसे वहीं नष्ट कर दिया गया ताकि दोबारा इसका उपयोग न हो सके। बरामद कच्ची शराब को कब्जे में लेकर नियमानुसार सील किया गया है। इस मामले में दो अलग-अलग अभियोग पंजीकृत किए गए हैं। गिरफ्तार महिला की पहचान सुमन पत्नी स्वर्गीय विनोद, निवासी बहुतिया, थाना मौरावां के रूप में हुई है। महिला से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस अवैध धंधे में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। जिला आबकारी अधिकारी अनुराग मिश्र का कहना है कि जिले में अवैध शराब के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। अधिकारियों ने साफ किया है कि कानून से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी स्तर पर क्यों न हों। आम लोगों से भी अपील की गई है कि अगर कहीं अवैध शराब के निर्माण या बिक्री की जानकारी मिले तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।
अवैध इलाज पर सख्ती : परियर में अवैध नर्सिंग होम पर प्रशासन का एक्शन
Fri, Jan 23, 2026
एसीएमओ की छापेमारी में खुली पोल, एक नर्सिंग होम बंद, दूसरे को रजिस्ट्रेशन कराने का आदेश
उन्नाव। शहर की तंग गलियों से लेकर गांवों के मोहल्लों तक बिना लाइसेंस चल रहे झोलाछाप क्लिनिक और बिना प्रशिक्षित डॉक्टरों के संचालित नर्सिंग होम मरीजों की जान पर भारी पड़ रहे हैं। न तो इनके पास पूरे कागजात हैं, न इलाज की बुनियादी सुविधाएं और न ही प्रशिक्षित स्टाफ। लंबे समय से चल रही इस मनमानी पर स्वास्थ्य विभाग ने अब सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में परियर क्षेत्र में की गई कार्रवाई से अवैध रूप से इलाज का धंधा चला रहे संचालकों में हड़कंप मच गया है।शुक्रवार को अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ) डॉ. नरेंद्र सिंह ने परियर और आसपास के इलाकों में छापेमारी की। इस दौरान कमला हॉस्पिटल और स्टार केयर हॉस्पिटल का निरीक्षण किया गया। जांच में सामने आया कि दोनों नर्सिंग होम बिना वैध पंजीकरण के संचालित हो रहे थे। संचालक रजिस्ट्रेशन से जुड़े कोई दस्तावेज नहीं दिखा सके। यही नहीं, यहां काम कर रहा स्टाफ भी प्रशिक्षित नहीं था और इलाज के नाम पर मानकों की खुली अनदेखी की जा रही थी। स्थिति को गंभीर मानते हुए एसीएमओ ने स्टार केयर हॉस्पिटल को तत्काल बंद कराते हुए सील करा दिया। वहीं कमला हॉस्पिटल के संचालक को नियमानुसार ऑनलाइन पंजीकरण कराने का निर्देश देते हुए कड़ी चेतावनी दी गई। साफ कहा गया कि अगर बिना रजिस्ट्रेशन दोबारा संचालन पाया गया तो संबंधित के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। कार्रवाई के दौरान नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों को सुरक्षित रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भेजा गया, ताकि उनके इलाज में किसी तरह की दिक्कत न आए। एसीएमओ डॉ. नरेंद्र सिंह ने कहा कि जिले में कई जगह गली-मोहल्लों में झोलाछाप क्लिनिक खुले हुए हैं और बिना प्रशिक्षित डॉक्टरों के नर्सिंग होम चलाए जा रहे हैं। ऐसे स्थानों पर न तो इलाज के मानक पूरे किए जा रहे हैं और न ही मरीजों की सुरक्षा का कोई इंतजाम है। यह सीधा-सीधा मरीजों की जान से खिलवाड़ है, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बिना पंजीकरण, बिना मानक और बिना प्रशिक्षित स्टाफ के नर्सिंग होम का संचालन गैरकानूनी है। विभाग का अभियान आगे भी जारी रहेगा और भविष्य में कहीं भी अवैध संचालन मिला तो संबंधित संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की इस सख्ती के बाद अवैध नर्सिंग होम और झोलाछाप क्लिनिक चलाने वालों में डर का माहौल है। विभाग का साफ संदेश है कि लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों को अब किसी भी कीमत पर छूट नहीं दी जाएगी।
ब्लैकआउट से लेकर रेस्क्यू तक : आपदा से निपटने को लेकर प्रशासन ने किया मॉकड्रिल
Fri, Jan 23, 2026
अधिकारियों ने कहा, आपदा के समय घबराहट नहीं, तालमेल और सतर्कता सबसे बड़ी ताकत
उन्नाव। किसी भी बड़ी आपदा या आपात हालात से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए शुक्रवार शाम पुलिस लाइन ग्राउंड में मॉकड्रिल कराई गई। यह अभ्यास नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर आयोजित किया गया, जिसमें युद्धकालीन परिस्थितियों, हवाई हमलों, ब्लैकआउट और अन्य गंभीर आपदाओं के दौरान प्रशासन और आम नागरिकों की भूमिका को व्यवहारिक रूप से परखा गया। मॉकड्रिल के तहत तय समय पर शहर की बिजली आपूर्ति कुछ देर के लिए बंद कर दी गई, जिससे ब्लैकआउट जैसी स्थिति बनी। पुलिस लाइन परिसर में सायरन बजते ही आपात स्थिति का संकेत दिया गया और सभी संबंधित विभाग हरकत में आ गए। पुलिस, प्रशासन, अग्निशमन, स्वास्थ्य विभाग और सिविल डिफेंस की टीमें निर्धारित योजना के अनुसार मौके पर पहुंचीं और अपने-अपने दायित्व निभाए। अभ्यास के दौरान यह दिखाया गया कि किसी आपदा की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक कैसे पहुंचाया जाए, घायलों को तुरंत प्राथमिक उपचार कैसे मिले और आग लगने या विस्फोट जैसी घटनाओं पर किस तरह काबू पाया जाए। सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों और पुलिसकर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित करने, घबराहट कम करने और सुरक्षित निकासी के तरीके का प्रदर्शन किया। स्वास्थ्य विभाग की टीम एंबुलेंस और जरूरी चिकित्सा उपकरणों के साथ तैयार नजर आई, जबकि अग्निशमन विभाग ने आग बुझाने के आधुनिक उपकरणों के साथ त्वरित कार्रवाई कर अपनी तैयारी दिखाई।
इस मौके पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश सिंह, अपर जिलाधिकारी सुशील कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक अखिलेश सिंह, सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी नगर दीपक यादव, सहायक पुलिस अधीक्षक (प्रशिक्षण) संचित शर्मा और मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनूप सिंह सहित तमाम अधिकारी मौजूद रहे।
एसएसपी जयप्रकाश सिंह ने कहा कि ऐसी मॉकड्रिल का मकसद केवल अभ्यास करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में सभी विभाग एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर तेजी से काम कर सकें। उन्होंने बताया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर आयोजित यह अभ्यास अनुशासन, साहस और देशभक्ति की भावना को भी मजबूत करता है। साथ ही उन्होंने आम लोगों से अपील की कि मॉकड्रिल के दौरान घबराने के बजाय प्रशासन का सहयोग करें।
अपर जिलाधिकारी सुशील कुमार ने नागरिकों की भूमिका को बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि ब्लैकआउट या आपात स्थिति में घरों और दुकानों में अनावश्यक रोशनी बंद रखें, अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। मॉकड्रिल के दौरान शहर के अन्य हिस्सों में भी हालात पर नजर रखी गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। कार्यक्रम के अंत में सभी अधिकारियों ने अभ्यास की समीक्षा की और जहां सुधार की जरूरत महसूस हुई, उस पर चर्चा की गई। प्रशासन ने साफ किया कि भविष्य में भी इस तरह के अभ्यास नियमित रूप से कराए जाएंगे, ताकि किसी भी आपदा या युद्ध जैसी स्थिति में उन्नाव पूरी तरह सतर्क और तैयार रहे।